कृषि वस्तुओं के निलंबन का खाद्य कीमतों और कृषि पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव
नई दिल्ली, दिल्ली, भारत शैलेश जे. मेहता स्कूल ऑफ मैनेजमेंट (SJMSOM), आईआईटी बॉम्बे और बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी (BIMTECH), नोएडा द्वारा प्रस्तुत एक स्वतंत्रशोध अलग-अलग अध्ययनों ने प्रचलित बाजार मिथक ‘कमोडिटी डेरिवेटिव ट्रेडिंग से मुद्रास्फीति बढ़ती है’ को ध्वस्त कर
JR Choudhary Verified Public Figure • 30 Mar, 2026Chief Editor
Nov 14, 2024 • 4:22 PM 0 0
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“कृषि वस्तुओं के निलंबन का खाद्य कीमतों और कृषि पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव”
शैलेश जे. मेहता स्कूल ऑफ मैनेजमेंट (SJMSOM), आईआईटी बॉम्बे और बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी (BIMTECH), नोएडा द्वारा प्रस्तुत एक स्वतंत्र शोध
अलग-अलग अध्ययनों ने प्रचलित बाजार मिथक ‘कमोडिटी डेरिवेटिव ट्रेडिंग से मुद्रास्फीति बढ़ती है’ को ध्वस्त कर दिया है
भारत के प्रमुख बी-स्कूलों में से एक, बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी (BIMTECH), नोएडा और शैलेश जे मेहता स्कूल ऑफ मैनेजमेंट (SJMSOM), IIT बॉम्बे ने एक्सचेंज ट्रेडेड कमोडिटीज (ETCDs) पर फ्यूचर डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के निलंबन के प्रभाव की जांच करने के लिए दो अलग-अलग अध्ययन किए। BIMTECH रिपोर्ट कमोडिटी डेरिवेटिव्स पर रोक का अंडरलाइंड कमोडिटी बाजार पर असर, में जनवरी 2016 से अप्रैल 2024 के बीच सरसों बीज, सोयाबीन, सोया तेल, सरसों तेल और पाम ऑयल का अध्ययन किया गया है । यह रिपोर्ट निर्णायक रूप से बताता है कि ETCDs (एक्सचेंज ट्रेडेड कमोडिटीज) के निलंबन के कारण वास्तविक बाजार में में संदर्भ मूल्य की अभाव की स्तिथि उत्पन्न हो जाती है , और इसके परिणामस्वरूप मंडी भाव एक जैसे नहीं रहते । विभिन्न मंडियों में भाव बहुत अलग-अलग होते हैं और कीमतें भी ज्यादा ऊपर-नीचे होती है। शैलेश जे मेहता स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, आईआईटी बॉम्बे द्वारा किए गए अध्ययन का शीर्षक है – कमोडिटी डेरिवेटिव्स पर रोक का कृषि तंत्र पर प्रभाव । इसमें द्वितीयक और प्राथमिक शोध को मिलाकर व्यापक तरीका अपनाया गया। प्राथमिक आंकड़े महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश में सर्वेक्षण और बाजार प्रतिभागियों (किसान और एफपीओ समेत) के गहन साक्षात्कार के जरिये इकट्ठे किए गए।, जिसमें सरसों बीज, सोया तेल, सोयाबीन, चना और गेहूं जैसी कमोडिटी को केंद्र में रखा गया। अध्ययन में इस बात का उल्लेख किया गया है डेरिवेटिव्स अनुबंध किसानों और वैल्यू चेन के दूसरे भागीदारों के लिए भाव तय करने तथा जोखिम संभालने का अहम जरिया होते हैं। इसके जरिये वे उतार-चढ़ाव और कृषि आर्थिक क्षेत्र में दूसरे जोखिमों को संभाल सकते हैं।
श्री संजय रावल और प्रोफेसर प्रबीना राजीब पत्रकारों के साथ
साल 2021 में, सेबी ने सात कृषि कमोडिटी/कमोडिटी समूहों में डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर रोक लगा दी। इसे 2003 में कमोडिटी एक्सचेंजों के आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक संस्करण के अस्तित्व में आने के बाद से भारतीय कमोडिटी डेरिवेटिव बाजार पर अब तक का सबसे बड़ा प्रतिबंध कहा जा सकता है। हालांकि निलंबन के लिए कोई विशेष कारण नहीं बताया गया, लेकिन ज्यादातर लोग यही मानते हैं कि चढ़ते भावों पर अंकुश लगाने के लिए रोक लगाई गई थी क्योंकि डर था कि डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग से कीमतें बढ़ रही हैं। इस संदर्भ में, भारत के दो प्रतिष्ठित संस्थानों ने ‘कमोडिटी डेरिवेटिव के निलंबन का कमोडिटी इकोसिस्टम पर प्रभाव ‘ का मूल्यांकन करते हुए एक व्यापक अध्ययन किया।
BIMTECH का अध्ययन डॉ. प्रबीनाराजीब, डा. रुचिअरोड़ा, बिमटेकसेऔरडॉ. परमाबराईआईआईटी, खड़गपुर द्वारा किया गया जो तीन दृष्टिकोणों पर केंद्रित है
स्थानीय मंडियों के लिए प्राइस एंकर उपलब्ध नहीं होने का असर।
कमोडिटी वायदा पर रोक और थोक तथा रिटेल स्तर पर खाद्य तेल के भाव पर असर।
निलंबित वस्तुओं के लिए अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में हेजिंग दक्षता
अध्ययन पर टिप्पणी करते हुए प्रोफेसरप्रबीनाराजीब ने कहा, “भारतमेंकमोडिटी डेरिवेटिव अनुबंध पर समय-समय पर रोक लगाना चलन जैसा बन गया है, जोनकेवलडेरिवेटिवक्षेत्रकेविकासमेंबाधाडालरहाहै, बल्किसमग्रकमोडिटीपारिस्थितिकीतंत्रकेविकासकोभीप्रभावितकररहाहै।हालांकि, दुनिया भर में कमोडिटी एक्सचेंज सैकड़ों वर्षों से बेरोकटोक कमोडिटी डेरिवेटिव्स अनुबंध चलाते आ रहे हैं, जबकि इन कमोडिटी में अक्सर आपूर्ति और मांग का मेल बिगड़ जाता है और कीमत ऊपर-नीचे होती रहती हैं ।इसशोधकेमाध्यमसेभारतमेंरोककेपीछेअंतर्निहितप्रचलितविश्वासप्रणालीमेंगहराईसेजानाऔरसबसेप्रमुखइकाई – हमारेकिसानोंऔरमूल्यश्रृंखलाप्रतिभागियोंपरइसकेप्रभावकोसमझनादिलचस्पथा।हमाराअध्ययनस्पष्टकरताहैकिडेरिवेटिववायदाकारोबारकेबारेमेंयहधारणाकिमूल्यमुद्रास्फीतिकीओरलेजातीहै, गलतहोसकतीहै।खुदराऔरथोकमूल्यकेहमारेविश्लेषणसेपताचलताहैकिविशेषरूपसेखाद्यतेलोंकेलिए, नकेवलनिलंबनअवधिकेदौरानसभीश्रेणियोंमेंकीमतोंमेंवृद्धिहुईहै, बल्किखुदराउपभोक्ताऔरभीअधिककीमतचुकारहेहैं।”
एसोसिएटप्रोफेसरसार्थकगौरव(अर्थशास्त्र) और सहायकप्रोफेसरपीयूषपांडे (वित्त) द्वाराकिएगएशैलेशजेमेहतास्कूलऑफमैनेजमेंटआईआईटीबॉम्बे अध्ययन में चार विशिष्ट उद्देश्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
पांच कमोडिटी डेरिवेटिव्स पर रोक के कृषि तंत्र पर हुए असर की पड़ताल करना।
कमोडिटी पर रोक के बाद पड़ने वाले प्रभाव की तस्वीर पेश करना और वायदा तथा हाजिस भाव, वॉल्यूम एवं उतार-चढ़ाव के बीच संबंध की पड़ताल करना।
यह समझना कि जिस कमोडिटी पर रोक लगाई गई, उसमें अटकलबाजी चिंता का विषय है या नहीं।
वास्तविक बाजार में भागीदारी करने वालों के बीच वायदा बाजार की समझ का पता लगाना। इसमें किसान समुदाय भी शामिल है, जिसके वायदा ट्रेडिंग के बारे में अनुभवों का अध्ययन बहुत कम हुआ है।
अपने शोध के बारे में बोलते हुए प्रोफेसरसार्थकगौरव ने टिप्पणी की, “हमारेशोधमेंपायागयाहैकिपांचनिलंबितवस्तुओंकेलिएकमोडिटीवायदाकारोबारऔरहाजिरबाजारकीकीमतोंकेबीचसकारात्मकसंबंधकाकोईसबूतनहींहै, जोयहदर्शाताहैकिवस्तुओंकेलिएवायदाकारोबारऔरखाद्यमुद्रास्फीतिकेबीचसंबंधगलतहै।वास्तवमें, तीनराज्यों – महाराष्ट्र, मध्यप्रदेशऔरगुजरातमेंकमोडिटीवायदाऔरहाजिरकीमतोंकेआंकड़ोंऔरसर्वेक्षणोंकेविश्लेषणपरआधारितअध्ययनदृढ़तासेस्थापितकरताहैकिजिनकमोडिटीपररोकलगाईगईऔरजिनपररोकनहींलगाईगई, दोनोंकेहीभावरोककेबादभीऊंचेहीबनेरहेऔरकमोडिटीकेरिटेलमूल्यपरघरेलूऔरविदेशीमांगतथाआपूर्तिकाअसरपड़ताहै“। उन्होंने आगे कहा कि “कमोडिटी डेरिवेटिव्स अनुबंध कीमत तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं, जोविश्लेषणसेस्पष्टहै।रोक के बाद रेफरेंस प्राइसिंग व्यवस्था खत्म हो जाने तथा मूल्य जोखिम प्रबंधन के तरीके बिगड़ जाने के कारण कमोडिटी के बेहतर भाव तय करने की प्रक्रिया पर प्रतिकूल असर पड़ा है।उचित मूल्य पता लगाने की प्रक्रिया में बाधा आई है और बाजार में प्रवेश तथा भागीदारी पर भी असर पड़ा है। “
दोनों अध्ययनों द्वारा सामने रखे गए दृष्टिकोण को जोड़ते हुए, कमोडिटीपार्टिसिपेंट्सएसोसिएशनऑफइंडिया (CPAI) के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीसंजयरावल ने कहा, “कमोडिटीऔरडेरिवेटिवट्रेडिंगकानिलंबननकेवलकृषिमूल्यश्रृंखलापरनकारात्मकप्रभावडालताहै, बल्कियहदीर्घअवधिमेंतंत्रमेंनिहितविश्वासकोभीतोड़ताहै।इसलिए, यहध्यानरखनाउचितहैकिइसतरहकेफैसलोंकाहमारेकमोडिटीबाजारपरभौतिकऔरवित्तीयदोनोंतरहसेदीर्घकालिकपरिणामहोतेहैं।घरेलूखुदराकीमतोंपरअंतरराष्ट्रीयबाजारों, भू–राजनीतिकवातावरण, मौसमसंबंधीविसंगतियों, आपूर्तिश्रृंखलाव्यवधानोंआदिजैसेसंभावितमौलिकमूल्यकोप्रभावितकरनेवालेकारकोंकेआलोकमेंइसतरहकेप्रतिगामीकदमोंकामूल्यांकनकियाजानाचाहिए”। उन्होंने आगे बताया कि, “डेरिवेटिवट्रेडिंगमूल्यखोजऔरमूल्यजोखिमप्रबंधनकेलिएवायदाबाजारकेलिएएकरेफरेंस प्राइसिंग प्रदानकरतीहै।यहांतककिभारतीयआर्थिकसर्वेक्षण 2023-24 नेकृषिडेरिवेटिवबाजारद्वारानिभाईगईमहत्वपूर्णभूमिकापरजोरदियाहै।मेराईमानदारीसेमाननाहैकिकमोडिटीवायदाबाजारप्रभावीरूपसेमूल्यखोजमेंतभीयोगदानदेसकताहैजबकईउपभोक्ता, उत्पादक, व्यापारीऔरएग्रीगेटरइनबाजारोंकाउपयोगअपनेजोखिमकोकमकरनेकेलिएकरें।”
इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट आनंद (आईआरएमए) में कमोडिटी मार्केट्स में उत्कृष्टता केंद्र के प्रोफेसर और समन्वयक डॉ. राकेशअरवटियानेकहा, “कमोडिटीडेरिवेटिव्सबाजारसंचालितउपकरणहैं, जोअस्थिरसमयकेदौरानढालकेरूपमेंकामकरतेहैं – मूल्यश्रृंखलाप्रतिभागियोंकेहितोंकीरक्षाकरतेहैंऔरकमोडिटीबाजारोंमेंस्थिरतालातेहैं।चूंकियेअपेक्षाकृतनएउपकरणहैं, इसलिएउनकेबारेमेंएकनिश्चितस्तरकीआशंकाहै।हालांकि, सरकारकोइनउपकरणोंकाउपयोगकिसानोंकोमूल्यअस्थिरताकेबावजूदउनकेमूल्यजोखिमकाप्रबंधनकरनेमेंमददकरनेकेलिएकरनाचाहिए, उन्हेंसक्रियरूपसेभागलेनेकेलिएप्रोत्साहितकरनाचाहिए, जिससेवॉल्यूमबढ़ेऔरबाजारकाविश्वासमजबूतहो।“
JR Choudhary Verified Public Figure • 30 Mar, 2026Chief Editor