उपखण्ड मुख्यालय होने के बावजूद इस तहसील पर नहीं हैं कोई सुविधाएँ

Demo सांचौर: आवश्यकताओं को देखते हुए चितलवाना को उपखंड मुख्यालय का दर्जा तो दे दिया, लेकिन उपखंड स्तर की सुविधाएं आज भी नहीं दी गई है। ऐसे में यहां के ग्रामीणों को समस्याओं का सामना ही करना पड़ रहा है। जो सुविधाएं उपखंड मुख्यालय पर होनी चाहिए, वे यहां होकर क्षेत्र के अन्य गांवों में है। साथ ही

JR Choudhary
JR Choudhary Verified Public Figure • 30 Mar, 2026 Chief Editor
Mar 31, 2017 • 9:24 PM  0  0
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उपखण्ड मुख्यालय होने के बावजूद इस तहसील पर नहीं हैं कोई सुविधाएँ
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31 Mar 2017
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उपखण्ड मुख्यालय होने के बावजूद इस तहसील पर नहीं हैं कोई सुविधाएँ
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सांचौर: आवश्यकताओं को देखते हुए चितलवाना को उपखंड मुख्यालय का दर्जा तो दे दिया, लेकिन उपखंड स्तर की सुविधाएं आज भी नहीं दी गई है। ऐसे में यहां के ग्रामीणों को समस्याओं का सामना ही करना पड़ रहा है। जो सुविधाएं उपखंड मुख्यालय पर होनी चाहिए, वे यहां होकर क्षेत्र के अन्य गांवों में है। साथ ही यहां की मूलभूत सुविधाओं में विस्तार नहीं किया गया है। जिस कारण क्षेत्रवासियों को उपखंड मुख्यालय बनने के बाद भी फायदा नहीं मिल पा रहा है।
 
उपखंड मुख्यालय के बड़े कार्यालय दूसरे गांवों में :-

चितलवाना से अन्य गांवों से जोड़ने के लिए सड़क सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं है। कस्बे की करीब साढ़े सात हजार जनसंख्या है, लेकिन जिला मुख्यालय से दूर होने के कारण यहां मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाई है। पंचायत समिति और उपखंड का दर्जा प्राप्त चितलवाना में करीब एक हजार परिवार निवास करते हैं, लेकिन यहां चिकित्सा सुविधा के नाम पर केवल प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र ही है। इसमें भी चिकित्सकों के पद रिक्त पड़े हैं। जबकि, इससे उच्च स्तर का सीएचसी और बीसीएमओ कार्य क्षेत्र के अधीन हाड़ेचा में बने हुए हैं। इसी प्रकार डिस्कॉम का एईएन कार्यालय भी चितलवाना की बजाय भादरूणा में बना हुआ है।

निराश हो जाते हैं लोग :- 

चितलवानाउपखंड मुख्यालय बाड़मेर सीमा से सटा हुआ है। मुख्यालय से काफी दूर-दराज में गांव बसे हुए हैं। ऐसे में ग्रामीणों को जब उपखंड मुख्यालय पर ही सुविधाएं उपलब्ध नहीं होती है तो कई समस्याएं झेलनी पड़ती है। दूर-दराज इलाके के लोगों को समस्या समाधान के लिए जिला मुख्यालय तक का सफर करना तो मुश्किल हो जाता है। .

सड़कें नहीं, रोडवेज भी नहीं :- 

चितलवानाउपखंड मुख्यालय पर सबसे बड़ी समस्या सड़कों की है। यहां सड़कों की स्थिति बदहाल होने के कारण आवागमन में परेशानी होती है। सबसे बड़ी विडंबना तो यह है कि यहां रोडवेज की व्यवस्था नहीं है। साथ ही हाइवे से दूरी होने के कारण चितलवाना से अधिक तो सिवाड़ा गांव को महत्व मिलता है। जनप्रतिनिधि भी चितलवाना के विकास के प्रति गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। गांव में बने सरकारी भी पुराने हालात के हो चुके हैं। पटवार भवन, पशु चिकित्सा भवन समेत कई सरकारी कार्यालय बदहाल और जर्जर हाल में है।

इनकी है आवश्यकता  :- 

गांवमें रोड लाइट, गली मोहल्लों में फैली गंदगी की सफाई, पीएचसी को सीएचसी बनाने की जरूरत, रोडवेज बसों का संचालन हो,
गौरव पथ का निर्माण, बस स्टेशन, यात्री प्रतीक्षालय.

^जिले में दूरस्थ होने का दंश चितलवाना को भी झेलना पड़ रहा है। अब सरकार ने स्मार्ट विलेज की घोषणा की है तो चितलवाना के लोगों की भी उम्मीदें जगी है कि क्षेत्र का विकास होगा। उपखंड मुख्यालय पर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हो तो कुछ राहत तो मिलेगी। 
-पंखी देवी, सरपंच, चितलवाना
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JR Choudhary Verified Public Figure • 30 Mar, 2026 Chief Editor

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