नौ रातें, जो सिर्फ पूजा नहीं, माँ की गोद का अहसास हैं - करिश्मा

जब भी नवरात्रे आते है, घरों में एक अलग ही खुशबु फैल जाती हैं। सुबह-सुबह जलते हुए घी  के दीये की महक, मंदिर से आती घंटियों की आवाज़ और हवा मे...

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NewsDesk Verified Media or Organization • 28 May, 2026 Editor
Oct 16, 2026 • 4:31 PM  0  0
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नौ रातें, जो सिर्फ पूजा नहीं, माँ की गोद का अहसास हैं - करिश्मा
“नौ रातें, जो सिर्फ पूजा नहीं, माँ की गोद का अहसास हैं - करिश्मा”
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16 Oct 2026
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नौ रातें, जो सिर्फ पूजा नहीं, माँ की गोद का अहसास हैं - करिश्मा
नौ रातें, जो सिर्फ पूजा नहीं, माँ की गोद का अहसास हैं - करिश्मा

जब भी नवरात्रे आते है, घरों में एक अलग ही खुशबु फैल जाती हैं। सुबह-सुबह जलते हुए घी  के दीये की महक, मंदिर से आती घंटियों की आवाज़ और हवा में घुली हुई एक अजीब सी शांति। लेकिन सच कहूँ तो, नवरात्र सिर्फ नौ दिन का कोई नियम-कानून नहीं हैं। ये वे दिन हैं जब हम सब कहीं न कहीं उस माँ की तलाश करते हैं जो हमें बिना किसी शर्त के प्यार करती हैं।

अगर हम थोड़ा रुककर सोचे, तो हममें से हर कोई अपनी जिंदगी की भाग दौड़ में कहीं न कही थक चुका हैं। कोई नौकरी के तनाव  में परेशान है, कोई घर परिवार की जिम्मेदारी के बोझ तले दबा है और कोई बस अपनों के बीच खुद को अकेला महसूस कर रहा है। ऐसे में, जब ये नौ रातें आती हैं, तो ऐसा लगता है जैसे ब्रह्मांड की सबसे बड़ी माँ ने अपनी बाहें फैला कर हमें पुकार कर बोला हो-“डर मत, मैं हूँ ना”।

अन्दर का महिषासुर और हमारा रोज का संघर्ष

हम पुराणों में महिषासुर की कथा पढ़ते हैं कि कैसे एक शक्तिशाली राक्षस ने सबका जीना मुश्किल कर दिया था। लेकिन क्या हमने कभी अपने अन्दर झाँक कर देखा हैं? वह महिषासुर कोई परलोक से आया राक्षस नहीं हैं,  वह आधुनिक युग का वह ‘तनाव’ और ‘अति-विचारशीलता’ हैं जो हमारी रातों की नींद छीन लेता हैं।

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