हिंदी में ज्योतिष अध्ययन के लिए हर्ष बावलिया (Harsh Bavaliya) की पाँच पुस्तकों का संग्रह

हर्षज्योतिषम् के तीन खंडों के साथ हर्षविधानम् और हर्षसूक्ष्मम् में क्रमबद्ध अध्ययन और अभ्यास पर जोरमुंबई (महाराष्ट्र) : हिंदी में ज्योतिष को...

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NewsDesk Verified Media or Organization • 28 May, 2026 Editor
Oct 9, 2026 • 3:33 PM | Mumbai  124  0
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हिंदी में ज्योतिष अध्ययन के लिए हर्ष बावलिया (Harsh Bavaliya) की पाँच पुस्तकों का संग्रह
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9 Oct 2026
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हिंदी में ज्योतिष अध्ययन के लिए हर्ष बावलिया (Harsh Bavaliya) की पाँच पुस्तकों का संग्रह
हर्षज्योतिषम् के तीन खंडों के साथ हर्षविधानम् और हर्षसूक्ष्मम् में क्रमबद्ध अध्ययन और अभ्यास पर जोर

मुंबई (महाराष्ट्र) : हिंदी में ज्योतिष को क्रम से समझने और उसका अभ्यास करने वाले विद्यार्थियों तथा जिज्ञासु पाठकों के लिए लेखक हर्ष बावलिया (Harsh Bavaliya) का पुस्तक-संग्रह विभिन्न अध्ययन आवश्यकताओं को साथ लाता है। इसमें हर्षज्योतिषम् शृंखला के तीन ग्रंथ—विहान, विवान और लीना–निदान–पार्थ—के साथ हर्षविधानम् तथा हर्षसूक्ष्मम् शामिल हैं। इन पुस्तकों में बुनियादी अवधारणाओं, गणना और फलित-विचार से लेकर पंचांग, पर्व-व्रत, मुहूर्त तथा कृष्णमूर्ति पद्धति तक के विषयों को स्थान दिया गया है।

इस संग्रह की पृष्ठभूमि लेखक के सीखने, सिखाने और शोध करने की यात्रा है। पिता और उनके गुरु के माध्यम से ज्योतिष से शुरुआती परिचय मिलने के बाद हर्ष ने अध्ययन को आगे बढ़ाया। हिंदी में ऐसी सामग्री तैयार करने का संकल्प रहा, जिसमें विद्यार्थी विषयों को केवल याद करने के बजाय उनका आधार समझ सके। इसी सोच से शुरू हुई एक पुस्तक की योजना आगे चलकर हर्षज्योतिषम् के तीन खंडों में विकसित हुई।

हर्षज्योतिषम् का पहला खंड विहान नींव और व्यवहार पर केंद्रित है। इसमें अध्ययन की शुरुआती अवधारणाओं, गणना और उनके प्रयोग को क्रम से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। विद्यार्थी जब किसी नए विषय पर पहुँचता है, तो उसके लिए संबंधित आधार और अभ्यास साथ रखना इस खंड की दिशा है। उद्देश्य यह है कि आगे के विषय पढ़ते समय उसे अपनी प्रारंभिक समझ पर बार-बार लौटने और उसे मजबूत करने का अवसर मिले।

दूसरा खंड विवान अध्ययन को अधिक गहराई तक ले जाता है। इसमें सूक्ष्म विश्लेषण और फलित-विचार से जुड़े विषयों को स्थान दिया गया है। पहले खंड से प्राप्त आधार के बाद विद्यार्थी विषयों के बीच संबंध समझ सके, गणना के अर्थ पर विचार कर सके और निष्कर्ष निकालने की प्रक्रिया का अभ्यास कर सके—यह इस खंड की अध्ययन-दिशा है। दोनों खंड मिलकर प्रारंभिक और आगे के अध्ययन के बीच क्रम बनाए रखने का प्रयास करते हैं।

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