संविधान पे चर्चा 4.0 में पारुल विश्वविद्यालय में विधिज्ञों ने संविधान पर की परिचर्चा

वडोदरा (गुजरात) [भारत], 1 अक्टूबर : पारूल विश्वविद्यालय में अपने अनुठे कानून सम्बन्धित कॉन्क्लेव संविधान पे चर्चा के चौथे संस्करण का आयोजन क...

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NewsDesk Verified Media or Organization • 28 May, 2026 Editor
Oct 2, 2026 • 9:03 AM | Vadodara  0  0
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संविधान पे चर्चा 4.0 में पारुल विश्वविद्यालय में विधिज्ञों ने संविधान पर की परिचर्चा
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संविधान पे चर्चा 4.0 में पारुल विश्वविद्यालय में विधिज्ञों ने संविधान पर की परिचर्चा

वडोदरा (गुजरात) [भारत], 1 अक्टूबर : पारूल विश्वविद्यालय में अपने अनुठे कानून सम्बन्धित कॉन्क्लेव संविधान पे चर्चा के चौथे संस्करण का आयोजन किया गया| इस समारोह में न्यायपालिका क्षेत्र के ख्यातनाम दिग्गज, वरिष्ठ अधिवक्ता गण, कानून के व्यवसायी और विधि के छात्रों ने सहभाग लिया| इस समारोह में संवैधानिक मूल्य, वर्तमान के कानून से जुड़े मुद्दे और कानून के बदलते परिप्रेक्ष्य के बारे में चर्चा की गई| इस कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों का मार्गदर्शन, चर्चा सत्र, पीयु संवाद, कार्यशालाएँ और प्रतियोगिता मंच थे और इनके द्वारा छात्रों को अपनी क्लासरूम के बाहर जाकर कानून क्षेत्र की हस्तियों के साथ संवाद करने का मौका मिला|

इन विशिष्ट दिग्गजों में भारतीय उच्चतम न्यायालय के आदरणीय न्यायमूर्ति श्री. विपूल एम. पंचोली, गुजरात उच्च न्यायालय के आदरणीय न्यायमूर्ति श्री. डी. एन. रे, गुजरात उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति आदरणीय श्री. एन. एस. संजय गोडा, भारतीय उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता तथा भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. गौरव भाटिया, भारतीय उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता सुश्री. महालक्ष्मी पावनी और भारतीय उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता सुश्री. अनिता शेणॉय समेत कानून के क्षेत्र से जुड़े कई विख्यात व्यक्ति सम्मीलित हुए| इनकी उपस्थिति से उभरते अधिवक्ताओं को न्यायपालिका क्षेत्र के दिग्गजों को प्रत्यक्षसुनने का मौका मिला तथा कानून शिक्षा और एडवोकसी से जुड़े वास्तविक पहलू समझने का मौका मिला|

कानून के व्यवसाय को ले कर संवैधानिक तत्त्वों का महत्त्व अधोरेखित करते हुए तथा भविष्य के अधिवक्ताओं के बारे में बात करए हुए आदरणीय न्यायमूर्ति श्री. विपूल मनुभाई पंचोली ने कहा, " कानून सीखानेवाले विश्वविद्यालय को सिर्फ कानून की शिक्षा देने का ही दायित्व नही होता है, बल्की व्यवसायिक नीतिमत्ता, संवैधानिक मूल्य और सामाजिक जिम्मेदारी को भी बढ़ावा देने का दायित्व होता है| इसलिए भविष्य के अधिवक्ताओं को सिर्फ कानून का ज्ञान होना पर्याप्त नही है, बल्की उन्हे जिस समाज और टेक्नोलॉजी के बीच कानून काम करता है, उन्हे भी समझना पड़ेगा| भविष्य के अधिवक्ता के रूप में स्मरण रखिए कि एडवोकसी सिर्फ जीतने के बारे में नही है, बल्की न्यायपूर्ण और कानून की दृष्टि से उचित निर्णय लेने में न्यायालय की सहायता करना भी है|”

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