रबी 2026–27: पानी की उपलब्धता और खेती की आर्थिक स्थिति तय करेगी फसलों का चुनाव और इनपुट की मांग
उदय राज आनंद, सीईओ – डोमेस्टिक बिजनेस, पारिजात इंडस्ट्रीज नई दिल्ली, 21 अक्टूबर : खरीफ़ सीजन के बाद, भारत का रबी 2026–27 सीजन चुनौतीपूर्ण प...
उदय राज आनंद, सीईओ – डोमेस्टिक बिजनेस, पारिजात इंडस्ट्रीज
नई दिल्ली, 21 अक्टूबर : खरीफ़ सीजन के बाद, भारत का रबी 2026–27 सीजन चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच शुरू हो रहा है। इसमें पानी की उपलब्धता, खेती की आर्थिक स्थिति और किसानों की वित्तीय हालत मुख्य कारक हैं, जो यह तय करेंगे कि कितनी ज़मीन पर खेती होगी और किन इनपुट (बीज, खाद आदि) की कितनी मांग होगी। रबी की बुवाई की तैयारी कर रहे किसानों के फैसले न केवल उपलब्ध पानी या फसलों की उपयुक्तता पर निर्भर करते हैं, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करते हैं कि पिछले सीजन (खरीफ) से उन्हें कितनी कमाई हुई है।
पानी की कमी से बदलेंगे क्षेत्रीय फसल पैटर्न
जून–सितंबर 2026 के दौरान मानसून की बारिश ‘लॉन्ग-पीरियड एवरेज’ (दीर्घकालिक औसत) का केवल 87% रही। नतीजतन, 178 प्रमुख जलाशयों में पानी का भंडारण उनकी कुल क्षमता के 70% तक गिर गया, जो पिछले एक दशक के 76.62% के औसत से कम है। दक्षिण भारत में पानी की सबसे ज्यादा कमी है, जहां जलाशयों में क्षमता का केवल 50% पानी बचा है, जबकि पिछले साल यह 87.25% था।