माता भगवती देवी शर्मा जन्मशताब्दी महोत्सव में 20 हजार से अधिक लोगों की सहभागिता, लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, अशांत दुनिया में गायत्री परिवार ने आध्यात्मिकता से दिखाई शांति की राह
नई दिल्ली, 31 अक्टूबर : लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि अखिल विश्व गायत्री परिवार व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण और राष्ट्र निर्माण की अलख जगा रहा है। वे परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के जन्मशताब्दी महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित इस समारोह में 20 हजार से अधिक लोगों ने शिरकत की। महोत्सव के दलनायक डॉ चिन्मय पण्ड्या ने लोकसभा अध्यक्ष का स्वागत और सम्मान किया।
बिरला ने आध्यात्मिक क्षेत्र में गायत्री परिवार की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि संस्था ने संस्कार निर्माण और मूल्यपरक शिक्षा के ज़रिए समाज में चेतना जागृत की है। अखंड दीप के सौ वर्षों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “यह अखंड ज्योति तब तक जलती रहेगी, जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रकाश नहीं पहुँच जाता।”
वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि आज जब दुनिया के कई देशों में अशांति फैली है, ऐसे दौर में अखिल विश्व गायत्री परिवार ने आध्यात्मिकता के ज़रिए शांति स्थापना की दिशा में काम किया है। उन्होंने कहा, “गाँव-गाँव में परिवार निर्माण और व्यक्ति निर्माण के ज़रिए राष्ट्र निर्माण का संकल्प पूरा हो, ऐसी कामना करता हूँ।”
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2026 गायत्री परिवार के लिए तीन शताब्दियों का संगम है। यह माता भगवती देवी शर्मा के जन्म, अखंड दीप के प्रज्वलन और युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य की साधना के सौ वर्ष पूरे होने का वर्ष है। डॉ चिन्मय पण्ड्या के अनुसार यह केवल उत्सव का नहीं, बल्कि सौ वर्षों की साधना, त्याग और समर्पण का ऐतिहासिक पड़ाव है।
समारोह में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी लोकसभा अध्यक्ष के साथ मंच साझा किया। सिंधिया ने उपस्थित जनसमुदाय से तीन संकल्प लेने का आह्वान किया। पहला, मातृत्व, प्रेम और भाईचारे का प्रचार और प्रसार। दूसरा, समाज के हर क्षेत्र में नारी का सम्मान और उन्हें आगे बढ़ाना। तीसरा, भारतीय संस्कृति का निरंतर संरक्षण और संवर्धन करते हुए उसे आने वाली पीढ़ी को समर्पित करना और नई पीढ़ी में आध्यात्मिक चेतना तथा राष्ट्र निर्माण की भावना का विकास करना। डॉ चिन्मय पण्ड्या ने केंद्रीय मंत्री का भी सम्मान किया।
महोत्सव का प्रथम चरण इसी वर्ष हरिद्वार के वैरागी द्वीप पर संपन्न हुआ था, जिसमें लाखों गायत्री परिजन शामिल हुए। दिल्ली में आयोजित द्वितीय चरण में वर्ष की शुरुआत में लिए गए संकल्पों की समीक्षा और भविष्य की कार्ययोजना पर विचार किया जा रहा है। देशभर से 20 हजार से अधिक लोग इस आयोजन में शामिल हुए, जिनमें बड़ी संख्या में युवा भी हैं। आयोजकों के अनुसार यह अनुभवी पीढ़ी और युवा शक्ति के बीच संवाद का अवसर भी है।
आयोजकों का कहना है कि महोत्सव का उद्देश्य राजतंत्र की व्यवस्था शक्ति और धर्मतंत्र की नैतिक चेतना को लोकमंगल के लिए एक साथ लाना है। युगऋषि ने समाज परिवर्तन के लिए शासन और अध्यात्म के सकारात्मक समन्वय को आवश्यक माना था, और दिल्ली का यह आयोजन उसी विचार को आगे बढ़ाने का प्रयास है।
महोत्सव का पहला दिन मातृशक्ति और नारी जागरण, दूसरा दिन वसुधैव कुटुम्बकम् और विश्व बंधुत्व, तथा तीसरा दिन युग निर्माण के महासंकल्प को समर्पित है। आयोजकों के अनुसार उद्देश्य यही है कि समारोह में लिए गए संकल्प केवल घोषणाएँ न रहें, बल्कि जनजीवन में सकारात्मक बदलाव का आधार बनें। नवंबर में हरिद्वार में प्रस्तावित चिंतन कार्यक्रमों के माध्यम से इन योजनाओं को और विस्तार दिया जाएगा।