Quick Read / Key Highlights

  • बड़ी उपलब्धि: मैत्रीवाड़ा गांव की बहू दीप्ति शिंदे वाघेला को अमेरिका की Seattle University School of Law में LL.M. के लिए करीब एक करोड़ रुपये की पूर्ण छात्रवृत्ति।
  • पहली स्कॉलर: दीप्ति का चयन 'मेहता वाही' की पहली स्कॉलर के रूप में हुआ है।
  • पूरा खर्च कवर: ट्यूशन फीस के साथ रहने, भोजन और अन्य निर्धारित खर्च भी छात्रवृत्ति में शामिल।
  • मजबूत पृष्ठभूमि: NLU जोधपुर से पढ़ाई और शार्दूल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी में वकील के रूप में अनुभव।
  • प्रेरणा का संदेश: विवाह के बाद भी शिक्षा और करियर को नई ऊंचाई देने की मिसाल।

जालोर के गांव से अंतरराष्ट्रीय मंच तक

जालोर जिले के रानीवाड़ा उपखंड के मैत्रीवाड़ा गांव की बहू दीप्ति शिंदे वाघेला ने अपनी शैक्षणिक उपलब्धि से पूरे क्षेत्र का मान बढ़ाया है। दीप्ति को अमेरिका की प्रतिष्ठित Seattle University School of Law में मास्टर ऑफ लॉज़ (LL.M.) की पढ़ाई के लिए करीब एक करोड़ रुपये की पूर्ण छात्रवृत्ति मिली है। इसके साथ ही उन्हें 'मेहता वाही' की पहली स्कॉलर के रूप में चुना गया है, जो इस उपलब्धि को और भी खास बनाता है।

छात्रवृत्ति में क्या-क्या शामिल

यह छात्रवृत्ति केवल ट्यूशन फीस तक सीमित नहीं है। इसके तहत रहने, भोजन और अन्य निर्धारित शैक्षणिक एवं जीवन-यापन से जुड़े खर्च भी कवर किए जाएंगे। विदेश में उच्च शिक्षा का सबसे बड़ा बोझ अक्सर रहने-खाने का खर्च होता है, ऐसे में पूर्ण छात्रवृत्ति दीप्ति को पूरी तरह पढ़ाई और पेशेवर विकास पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर देगी।

NLU जोधपुर से SAM और अब सिएटल

दीप्ति ने राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, जोधपुर (NLU Jodhpur) से कानून की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने देश की प्रमुख कॉर्पोरेट लॉ फर्मों में शामिल शार्दूल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी (Shardul Amarchand Mangaldas & Co. — SAM) में वकील के रूप में काम किया। प्रतिष्ठित संस्थान से शिक्षा, अग्रणी लॉ फर्म में अनुभव और अब विदेश में LL.M., यह सफर दिखाता है कि कानून के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय करियर का रास्ता किस तरह मेहनत और योजना से तैयार होता है।

भोपाल की बेटी, मैत्रीवाड़ा की बहू

मूल रूप से मध्य प्रदेश के भोपाल की रहने वाली दीप्ति का विवाह मैत्रीवाड़ा गांव के बेहद साधारण परिवार में हुआ है। उनके पति अरविंद वाघेला भी NLU जोधपुर के पूर्व छात्र हैं और वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाली डिजिटल एजेंसी Coozmoo Digital Solutions के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। दंपती का एक ही प्रतिष्ठित संस्थान से जुड़ाव इस उपलब्धि को खास पहचान देता है। परिवार के सहयोग और दीप्ति की निरंतर मेहनत ने इस सफर में अहम भूमिका निभाई है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह उपलब्धि

मारवाड़ जैसे क्षेत्रों में विवाह के बाद महिलाओं की पढ़ाई और करियर अक्सर पीछे छूट जाते हैं। ऐसे माहौल में एक स्थानीय परिवार की बहू का अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय में पूर्ण छात्रवृत्ति के साथ चयन होना एक मजबूत सामाजिक संदेश है। यह दिखाता है कि जब परिवार साथ खड़ा हो, तो शादी किसी महिला की महत्वाकांक्षाओं का अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत बन सकती है।

क्षेत्र में खुशी और प्रेरणा

दीप्ति की सफलता को मैत्रीवाड़ा, रानीवाड़ा और पूरे जालोर जिले के लिए गौरव के रूप में देखा जा रहा है। खासकर बेटियों और बहुओं के लिए यह उदाहरण है कि प्रतिभा और दृढ़ संकल्प के आगे भौगोलिक सीमाएं बाधा नहीं बनतीं।