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<title>Jalore Live &#45; : मानवीय कहानी</title>
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<description>Jalore Live &#45; : मानवीय कहानी</description>
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<dc:rights>© 2026 Jalore Live &#45; All Rights Reserved.</dc:rights>

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<title>माँ की आशा बनी आयशा, कहानी जो दिल छू ले</title>
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<description><![CDATA[  नई दिल्ली : भारतीय सिनेमा की उभरती हुई अभिनेत्री आयशा एस ऐमन,जो कभी मिस इंडिया इंटरनेशनल का ताज पहन चुकी हैं,आज आत्मबल और संकल्प की मिसाल हैं। लेकिन उनकी ज़िंदगी का सबसे भावुक फैसला वो था,जब उन्होंने अपनी माँ का एक अधूरा सपना पूरा करने के लिए अपना नाम बदलने का नि ]]></description>
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<pubDate>Mon, 11 Aug 2025 13:40:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>JR Choudhary</dc:creator>
<media:keywords>Human Story, lifestyle</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<br /><p></p><h1 dir="ltr"></h1><p dir="ltr"><strong>नई दिल्ली :&nbsp;</strong>भारतीय सिनेमा की उभरती हुई अभिनेत्री आयशा एस ऐमन,&nbsp;जो कभी मिस इंडिया इंटरनेशनल का ताज पहन चुकी हैं,&nbsp;आज आत्मबल और संकल्प की मिसाल हैं। लेकिन उनकी ज़िंदगी का सबसे भावुक फैसला वो था,&nbsp;जब उन्होंने अपनी माँ का एक अधूरा सपना पूरा करने के लिए अपना नाम बदलने का निर्णय लिया।</p><p dir="ltr">आयशा बताती हैं: “मेरा जन्म नाम ‘सुप्रिया’ था। यही नाम मेरे साथ स्कूल से लेकर एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग क्लासेस,&nbsp;फैशन शोज़,&nbsp;अंतरराष्ट्रीय दौरों,&nbsp;मिस इंडिया पेजेंट्स और ब्यूटी कॉन्टेस्ट्स तक जुड़ा रहा। इसी नाम से मैंने डिग्रियाँ हासिल कीं,&nbsp;एग्ज़ाम्स टॉप किए और भारत को सोन्दर्य प्रतियोगिता में मिस इंटरनेशनल के मन्च पर रिप्रेज़ेंट किया। मैंने ऑल इंडिया एरोनॉटिकल एंट्रेंस एग्ज़ाम भी इसी नाम से टॉप किया था!</p><p dir="ltr">मेरे लिए ‘सुप्रिया’ नाम आत्मविश्वास,&nbsp;मेहनत और जुनून का प्रतीक था।”</p><p dir="ltr">“लेकिन हर उपलब्धि के पीछे थी मेरी माँ — श्रीमती आशा देवी,&nbsp;जो पिछले&nbsp;25&nbsp;वर्षों से भारतीय न्यायपालिका में सेवा दे रही हैं और न्याय को गरिमा व मजबूती से निभा रही हैं —और उनकी एक खामोश ख्वाहिश: मुझे ‘आयशा’ नाम देने की।”</p><p dir="ltr">उनके भीतर एक छोटी-सी अधूरी इच्छा थी,&nbsp;जो अक्सर उन्होंने मुझसे कही: “मैं तुम्हारा नाम ‘आयशा’ रखना चाहती थी — ‘आशा सा’,&nbsp;जैसे एक उम्मीद,&nbsp;लेकिन किसी वजह से नहीं रख पाई।”</p><p dir="ltr">आयशा याद करती हैं: “जब उन्होंने चौथी बार ये बात मुंबई में कही,&nbsp;तो उनकी निगाहें झुकी हुई थीं,&nbsp;और चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान थी। मैंने उनकी आँखों में गहराई से देखा,&nbsp;और उसी पल मैंने ठान लिया — अब मैं उनका सपना पूरा करूंगी। और मैंने बिना एक पल की देरी किए,&nbsp;अपना नाम बदल दिया।”</p><p dir="ltr">यह नाम बदलना किसी करियर प्लान का हिस्सा नहीं था — यह बस एक बेटी का संकल्प था,&nbsp;जो अपनी माँ की दिल से निकली एक ख्वाहिश को पूरा करना चाहती थी।</p><p dir="ltr">अब मेरा आधिकारिक नाम है — आयशा एस ऐमन:</p><p dir="ltr">•‘आयशा’,&nbsp;वो नाम जो मेरी माँ हमेशा रखना चाहती थीं।</p><p dir="ltr">•‘S’,&nbsp;सुप्रिया की संघर्षों और उपलब्धियों की पहचान।</p><p dir="ltr">•‘ऐमन’,&nbsp;जो मेरे पारिवारिक संस्कारों और जड़ों का प्रतीक है।</p><p dir="ltr">आयशा आगे कहती हैं: “जब अपना नाम आधिकारिक तौर पर बदला और माँ को बताया,&nbsp;तो उनकी आँखों में आँसू थे… और मेरे दिल में एक गहरा सुकून। ऐसा लगा जैसे मैंने कोई ताज नहीं,&nbsp;बल्कि अपनी माँ का आशीर्वाद पा लिया हो।”</p><p dir="ltr">लोग अकसर पूछते हैं: “इतनी कामयाबी के बाद नाम क्यों बदला?”</p><p dir="ltr">मैं मुस्कुराकर कहती हूँ:" ये नाम शोहरत के लिए नहीं था,&nbsp;ये मेरी माँ के उस खामोश ख्वाब को पूरा करने का वादा था।”</p><p dir="ltr">अब जब कोई मुझे ‘आयशा’ कहता है,&nbsp;तो वो सिर्फ एक नाम नहीं लगता —</p><p dir="ltr">लगता है जैसे मेरी माँ मुझे पुकार रही हों — ‘आशा सा’,&nbsp;एक उम्मीद की तरह।</p><p dir="ltr">ये नाम उन्हीं को समर्पित है। क्योंकि वो अब मेरे साथ सिर्फ माँ नहीं,&nbsp;मेरा नाम बनकर हमेशा रहेंगी।</p><p dir="ltr">सुप्रिया की ओर से — प्यार के साथ। अब और हमेशा,आयशा एस ऐमन।</p><p></p><p dir="ltr"></p><p></p><p dir="ltr">अस्वीकरण:&nbsp;इस अनुभाग में प्रस्तुत सामग्री किसी तृतीय पक्ष प्रेस विज्ञप्ति सेवा का हिस्सा है और यह हमारे संपादकीय विचारों या राय को प्रतिबिंबित नहीं करती। जानकारी की सटीकता,&nbsp;प्रामाणिकता और वैधता की पूरी ज़िम्मेदारी केवल सामग्री प्रदाता की है। हम इस व्यवस्था के तहत प्रकाशित सामग्री के लिए कोई जिम्मेदारी नहीं लेते और पाठकों को सलाह देते हैं कि जानकारी का उपभोग करने से पहले इसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित करें।</p>]]> </content:encoded>
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<title>रिंकू सिंह का ओजोन सिटी में आलीशान घर और उनके संघर्ष की कहानी</title>
<link>https://www.jalorelive.com/special/human-story/rinku-singhs-luxurious-house-in-ozone</link>
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<description><![CDATA[  दिल्ली, 11 नवंबर :  भारतीय क्रिकेट में रिंकू सिंह का नाम तेजी से उभर रहा है , और हाल ही में उनके द्वारा खरीदे गए आलीशान बंगले ने उनके फैंस के बीच हलचल मचा दी है। अलीगढ़ के ओजोन सिटी में स्थित यह बांग्ला , उनके संघर्ष की गाथा और सफलता का प्रतीक है। इस लेख में हम जानेंगे ]]></description>
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<pubDate>Mon, 11 Nov 2024 16:03:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>JR Choudhary</dc:creator>
<media:keywords>Human Story, lifestyle</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<br /><p></p><h1 dir="ltr"></h1><p dir="ltr"><strong>दिल्ली, 11 नवंबर :</strong><span>&nbsp;</span><span>भारतीय क्रिकेट में रिंकू सिंह का नाम तेजी से उभर रहा है</span><span>,&nbsp;</span><span>और हाल ही में उनके द्वारा खरीदे गए आलीशान बंगले ने उनके फैंस के बीच हलचल मचा दी है। अलीगढ़ के ओजोन सिटी में स्थित यह बांग्ला</span><span>,&nbsp;</span><span>उनके संघर्ष की गाथा और सफलता का प्रतीक है। इस लेख में हम जानेंगे कि कैसे एक साधारण परिवार में जन्में रिंकू ने क्रिकेट के मैदान पर अपनी जगह बनाई और अपने मेहनत से इस बंगले के मालिक बने।</span></p><h3 dir="ltr"><span>रिंकू सिंह की पृष्ठभूमि और संघर्ष</span></h3><p dir="ltr"><span>रिंकू सिंह का जन्म&nbsp;</span><span>12&nbsp;</span><span>अक्टूबर&nbsp;</span><span>1997&nbsp;</span><span>को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में हुआ। उनके पिता खानचंद एक गैस डिलीवरी एजेंट हैं और माता बीना देवी एक गृहिणी। रिंकू का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था</span><span>,&nbsp;</span><span>और शुरुआत में उन्हें कई तरह की आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बचपन से ही रिंकू को क्रिकेट का शौक था</span><span>,&nbsp;</span><span>परंतु सीमित संसाधनों के कारण उन्हें पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल सकीं।</span></p><p dir="ltr"><span>रिंकू का यह सपना था कि वे अपने परिवार को गरीबी से निकालें और अपने पैरों पर खड़े हों। उनके संघर्ष की यह कहानी यहीं नहीं रुकती</span><span>,&nbsp;</span><span>उन्होंने क्रिकेट के प्रति अपने जुनून को कभी कम नहीं होने दिया और धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाने लगे। उनके शुरुआती दिन बहुत कठिन थे</span><span>,&nbsp;</span><span>लेकिन उनका दृढ़ निश्चय और माता-पिता का समर्थन उन्हें निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहा।</span></p><h3 dir="ltr"><span>क्रिकेट करियर का आरंभ</span></h3><p dir="ltr"><span>रिंकू सिंह ने घरेलू क्रिकेट में उत्तर प्रदेश की ओर से खेलते हुए अपने करियर की शुरुआत की। उनकी कड़ी मेहनत और क्रिकेट के प्रति समर्पण ने उन्हें धीरे-धीरे पहचान दिलाई। शुरुआती दौर में रिंकू को कई असफलताओं का सामना करना पड़ा</span><span>,&nbsp;</span><span>लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनकी मेहनत ने आखिरकार उन्हें इंडियन प्रीमियर लीग (</span><span>IPL)&nbsp;</span><span>में जगह दिलाई</span><span>,&nbsp;</span><span>जो उनकी जिंदगी का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।</span></p><h3 dir="ltr"><span>कोलकाता नाइट राइडर्स में उनका सफर</span></h3><p dir="ltr"><span>रिंकू सिंह को&nbsp;</span><span>2018&nbsp;</span><span>में कोलकाता नाइट राइडर्स (</span><span>KKR)&nbsp;</span><span>ने मात्र&nbsp;</span><span>50&nbsp;</span><span>लाख रुपये के बेस प्राइस पर खरीदा था। शुरुआती दो सीजन में उन्हें टीम में अधिक मौके नहीं मिल पाए</span><span>,&nbsp;</span><span>लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत से सभी को प्रभावित किया।&nbsp;</span><span>2023&nbsp;</span><span>में उनकी प्रतिभा ने सबका ध्यान खींचा जब उन्होंने गुजरात टाइटंस के खिलाफ पांच लगातार छक्के लगाकर अपनी टीम को जीत दिलाई। इस पारी ने उन्हें रातोंरात एक स्टार बना दिया और उनका नाम क्रिकेट प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बन गया।</span></p><p dir="ltr"><span>रिंकू की यह सफलता&nbsp;</span><span>KKR&nbsp;</span><span>के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित हुई और उनकी बदौलत टीम ने कई मैच जीते।&nbsp;</span><span>KKR&nbsp;</span><span>ने उनके इस योगदान को सराहा और&nbsp;</span><span>IPL 2025&nbsp;</span><span>के लिए उन्हें&nbsp;</span><span>13&nbsp;</span><span>करोड़ रुपये में रिटेन किया। यह रिटेंशन न केवल उनके खेल का सम्मान था बल्कि उनके द्वारा वर्षों से किए जा रहे संघर्ष और मेहनत का फल भी था।</span></p><p><img alt="" height="640" src="https://hindi.sangritoday.com/uploads/images/202411/image_1600x_6731d7dbbf234.webp" width="640" /></p><h3 dir="ltr"><span>नया बंगला: एक सपना हुआ साकार</span></h3><p dir="ltr"><span>रिंकू सिंह ने अलीगढ़ के ओजोन सिटी में स्थित&nbsp;</span><span>'</span><span>द गोल्डन एस्टेट</span><span>'&nbsp;</span><span>में&nbsp;</span><span>500&nbsp;</span><span>वर्ग गज का एक आलीशान बंगला खरीदा है। बंगले की कीमत करीब&nbsp;</span><span>3.5&nbsp;</span><span>करोड़ रुपये बताई जा रही है। बंगले का रजिस्ट्रेशन कोल तहसील में हुआ और रिंकू ने अपने परिवार के साथ इसमें प्रवेश किया। घर में प्रवेश के दौरान उनके परिवार के सदस्य और स्थानीय गणमान्य लोग भी मौजूद थे।</span></p><p dir="ltr"><span>रिंकू सिंह का यह घर केवल एक संपत्ति नहीं बल्कि उनके संघर्ष की कहानी का प्रतीक है। इस घर में प्रवेश के बाद रिंकू ने अपने माता-पिता को इसकी चाबी सौंपते हुए एक खास समारोह का आयोजन किया</span><span>,&nbsp;</span><span>जिसमें उनके माता-पिता की आँखों में गर्व और खुशी साफ झलक रही थी।</span></p><p><b>&nbsp;</b></p><h3 dir="ltr"><span>बंगले की विशेषताएँ</span></h3><p dir="ltr"><span>रिंकू सिंह का नया घर आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है। ओजोन सिटी का&nbsp;</span><span>'</span><span>द गोल्डन एस्टेट</span><span>'&nbsp;</span><span>अलीगढ़ का एक उच्चस्तरीय रिहायशी क्षेत्र है</span><span>,&nbsp;</span><span>जहाँ केवल चुनिंदा लोग ही घर बना सकते हैं। रिंकू के इस बंगले में बड़े-बड़े कमरे</span><span>,&nbsp;</span><span>हरे-भरे बगीचे</span><span>,&nbsp;</span><span>निजी लिफ्ट</span><span>,&nbsp;</span><span>निजी स्विमिंग पूल</span><span>&nbsp;</span><span>और एक प्राइवेट एरिया है</span><span>,&nbsp;</span><span>जो इसे और भी आकर्षक बनाता है। इस घर में सभी आधुनिक सुविधाएँ मौजूद हैं जो किसी भी क्रिकेट स्टार के स्तर के अनुरूप हैं।</span></p><h3 dir="ltr"><span>रिंकू सिंह का संघर्ष युवाओं के लिए प्रेरणा</span></h3><p dir="ltr"><span>रिंकू सिंह की सफलता केवल क्रिकेट जगत में ही नहीं बल्कि जीवन में भी संघर्ष कर रहे कई युवाओं के लिए एक प्रेरणा है। उनके संघर्ष की कहानी यह सिखाती है कि अगर मन में जुनून और कुछ कर गुजरने का हौसला हो तो कोई भी मंजिल असंभव नहीं होती। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को साकार करने के लिए कभी हार नहीं मानी।</span></p><p dir="ltr"><span>रिंकू का यह सफर दिखाता है कि कैसे एक साधारण पृष्ठभूमि से आने वाला व्यक्ति भी मेहनत और लगन के दम पर सफलता की ऊंचाइयों को छू सकता है। उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है</span><span>,&nbsp;</span><span>जो सीमित साधनों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने की हिम्मत रखते हैं।</span></p><h3 dir="ltr"><span>भविष्य की योजनाएँ और उम्मीदें</span></h3><p dir="ltr"><span>रिंकू सिंह का करियर अभी भी शुरुआती दौर में है और उनके फैंस उनसे भविष्य में और भी बेहतरीन प्रदर्शन की उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने न केवल&nbsp;</span><span>IPL&nbsp;</span><span>में बल्कि घरेलू क्रिकेट में भी अपनी पहचान बनाई है। हाल ही में</span><span>,&nbsp;</span><span>उन्हें भारतीय टीम में भी मौका मिला और अब उन्हें इस बात का इंतजार है कि वे जल्द ही भारतीय टीम में स्थाई सदस्य बनें।</span></p><p dir="ltr"><span>रिंकू का सपना है कि वह अपने देश के लिए क्रिकेट खेलें और अपने प्रदर्शन से भारतीय क्रिकेट का नाम रोशन करें। उनके द्वारा खरीदा गया यह बंगला उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि है</span><span>,&nbsp;</span><span>लेकिन वह इसे अपने सफर का अंत नहीं मानते। उनकी दृष्टि और लक्ष्य अभी भी काफी ऊँचे हैं</span><span>,&nbsp;</span><span>और वे अपनी मेहनत और समर्पण से उन्हें प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं।</span></p><h3 dir="ltr"><span>निष्कर्ष</span></h3><p dir="ltr"><span>रिंकू सिंह की कहानी हमें यह सिखाती है कि मेहनत और संकल्प से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उनका नया बंगला उनके सपनों की पूर्ति का प्रतीक है</span><span>,&nbsp;</span><span>लेकिन उनकी असल उपलब्धि उनका मेहनती और संघर्षपूर्ण जीवन है</span><span>,&nbsp;</span><span>जो उन्हें हर क्रिकेट प्रेमी के दिल में एक खास जगह दिलाता है। उनके फैंस और पूरे देश को उनसे आगे भी शानदार प्रदर्शन की उम्मीद है</span><span>,&nbsp;</span><span>और यह तय है कि रिंकू अपने खेल से क्रिकेट प्रेमियों को निरंतर खुशियाँ देते रहेंगे।</span></p><p dir="ltr"><span>ADA AND RERA APPROVED: UPRERAPRJ502288, UPRERAPRJ510771</span></p><p><!--x-tinymce/html--></p><h2 dir="ltr"></h2><p></p><p></p><p dir="ltr"><span>फ़ोन:</span><span>&nbsp;781-789-1010</span><span><br /></span><span>वेबसाइट:</span><span>&nbsp;</span><a href="http://www.ozonebuilders.com/"><span>www.ozonebuilders.com</span></a><span>&nbsp;and&nbsp;</span><a href="http://www.thegoldenestate.in/"><span>www.thegoldenestate.in</span><span><br /></span></a><span>पता:</span><span>&nbsp;Ozone Club, Ozone Road, Aligarh, Uttar Pradesh 202001</span></p>]]> </content:encoded>
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<title>परोपकारी अभिनेता हैं आदित्य ओम</title>
<link>https://www.jalorelive.com/special/human-story/aditya-om-is-philanthropist-actor</link>
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<description><![CDATA[  अभिनेताओं द्वारा परोपकार और दान हाल ही में खबरों में रहा है लेकिन प्रसिद्ध तेलुगु अभिनेता आदित्य ओम कई वर्षों से चुपचाप ग्रामीण उत्थान पर काम कर रहे हैं।  आदित्य ओम, जिन्हें &#039;बंदूक&#039; और &#039;अलिफ़&#039; जैसी समीक्षकों द्वारा प्रशंसित फिल्मों के अभिनेता के रूप में हिंदी दर्शकों में भी जाना ज ]]></description>
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<pubDate>Mon, 21 Feb 2022 13:29:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>JR Choudhary</dc:creator>
<media:keywords>Human Story, lifestyle</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<br /><div id="m_530841217733915444ydpc4b9e6cfyiv5490962811yMail_cursorElementTracker_1645335783536">अभिनेताओं
 द्वारा परोपकार और दान हाल ही में खबरों में रहा है लेकिन प्रसिद्ध तेलुगु
 अभिनेता आदित्य ओम कई वर्षों से चुपचाप ग्रामीण उत्थान पर काम कर रहे हैं।&nbsp;</div><div id="m_530841217733915444ydpc4b9e6cfyiv5490962811yMail_cursorElementTracker_1645335783536">&nbsp;</div><div id="m_530841217733915444ydpc4b9e6cfyiv5490962811yMail_cursorElementTracker_1645335783536">आदित्य ओम, जिन्हें 'बंदूक' और 'अलिफ़' जैसी समीक्षकों द्वारा प्रशंसित 
फिल्मों के अभिनेता के रूप में हिंदी दर्शकों में भी जाना जाता है और 
पुरस्कार विजेता फिल्म 'मास्साब’ के निर्देशक के रूप में भी ,उन्होंने 
तेलंगाना के चेरुपल्ली गांव को गोद लिया है और वहां कई जागरूकता और विकास 
कार्य कर रहे हैं वर्षों से ।</div><div id="m_530841217733915444ydpc4b9e6cfyiv5490962811yMail_cursorElementTracker_1645335783536">&nbsp;</div><div id="m_530841217733915444ydpc4b9e6cfyiv5490962811yMail_cursorElementTracker_1645335783536">क्षेत्र के स्कूलों को नियमित सहायता, 
पुस्तकालय का निर्माण, वृक्षारोपण, प्रतिभाशाली छात्रों की मदद करना, 
डिजिटल जागरूकता और केंद्र, कोविड काल में ज़रूरी सहायता इत्यादि उनकी कुछ 
गतिविधियाँ रही हैं।&nbsp;</div><div id="m_530841217733915444ydpc4b9e6cfyiv5490962811yMail_cursorElementTracker_1645335783536">&nbsp;</div><div id="m_530841217733915444ydpc4b9e6cfyiv5490962811yMail_cursorElementTracker_1645335783536">उनकी योजना इस साल एक एम्बुलेंस सेवा शुरू करने और 
आदिवासी क्षेत्रों में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए काम करने की 
है।&nbsp;</div><div id="m_530841217733915444ydpc4b9e6cfyiv5490962811yMail_cursorElementTracker_1645335783536">&nbsp;</div><div id="m_530841217733915444ydpc4b9e6cfyiv5490962811yMail_cursorElementTracker_1645335783536">आदित्य ओम कहते हैं कि लोगों की बढ़ती उम्मीदों को पूरा करना एक चुनौती
 है और वह आदिवासी क्षेत्रों के युवाओं को उनकी पूरी क्षमता हासिल करने के 
लिए मार्गदर्शन करना चाहते हैं। आदित्य ओम की हिंदी में आने वाली फिल्में 
हैं 'कोटा' 'बंदी' और ‘बग़ावत’।</div><div id="m_530841217733915444ydpc4b9e6cfyiv5490962811yMail_cursorElementTracker_1645335826516"><br /><br /><br /><br /></div>]]> </content:encoded>
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<title>भूषण कुमार ने ओटीटी&#45;स्पेस में दस्तक दी</title>
<link>https://www.jalorelive.com/special/human-story/bhushan-kumar-forays-into-ott-space</link>
<guid>https://www.jalorelive.com/special/human-story/bhushan-kumar-forays-into-ott-space</guid>
<description><![CDATA[ वर्षों से संगीत के क्षेत्र में निर्विवाद सफलता और फिल्मों में एक मजबूत पहचान बनाने के बाद, भूषण कुमार ने टी-सीरीज़ का विस्तार किया, अब वेब सीरीज़ का निर्माण करने के लिए तैयार हैं।   टी-सीरीज, एशिया का सबसे बड़ा म्यूजिक लेबल, प्रकाशक और भारत का सबसे बड़ा फिल्म स्टूडियो ओटीटी प्लेटफॉ ]]></description>
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<pubDate>Thu, 03 Feb 2022 14:17:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>JR Choudhary</dc:creator>
<media:keywords>Human Story</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><br /></p><div class="separator"><a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/a/AVvXsEhXaV8FsQb3XgnUUviSzzWV4-udLM3l3DrsYIYe89ybHyuFWI8CVzStyIZ53MdTxaSPcQgr4PGi1m41mJZ6sCI5n94nmnK-L-4cWnPG6q1CRZ_UE0IGMbyVLyiunvzRmnHB6PaCDGocLHu8WRxkQlWVXQx9tkU3EEd_BhQjXZw1d3m-NHixeLzDIFP9"></a></div><div dir="auto"><div><div class="gmail_quote"><div class="gmail_attr" dir="ltr"><br /></div>वर्षों
 से संगीत के क्षेत्र में निर्विवाद सफलता और फिल्मों में एक मजबूत पहचान 
बनाने के बाद, भूषण कुमार ने टी-सीरीज़ का विस्तार किया, अब वेब सीरीज़ का 
निर्माण करने के लिए तैयार हैं।</div><div class="gmail_quote"><div dir="auto"><div class="gmail_quote" dir="auto"><div class="gmail_quote" dir="auto"><div class="gmail_attr" dir="ltr">&nbsp; &nbsp;&nbsp;</div><div class="gmail_attr" dir="ltr">टी-सीरीज,
 एशिया का सबसे बड़ा म्यूजिक लेबल, प्रकाशक और भारत का सबसे बड़ा फिल्म 
स्टूडियो ओटीटी प्लेटफॉर्म पर वेब-सीरीज का निर्माण करने जा रहा है। भूषण 
कुमार की टी-सीरीज़ सभी माध्यमों के लिए सामग्री बनाने पर ध्यान केंद्रित 
करेगी, जो दर्शकों के सभी क्षेत्रों के लिए अपील करेगी, जिसमें सभी शैलियों
 में मनोरंजक शो, सभी की उंगलियों पर पहुंच योग्य होंगे।</div><div class="gmail_attr" dir="ltr">&nbsp;</div><div class="separator"><a href="https://blogger.googleusercontent.com/img/a/AVvXsEh0-3Z-iac1NIMmdrOk9qa6vSR_3nYGUBrxKIL0gKJ1LerDm3vy1oqH1N8pvTTOaNc3tVSPkQ9EMiU4-YYOVG5zO6oaWeKo5faoCfB6soiWBlR0KvObDc0PWzJXZaNbAeLST7mE5unjcRbrisRTKpUdQ29epnO5sEvEXeLwFg8ZF9z15cvQt7rcsc3r"></a></div><div class="gmail_attr" dir="ltr"> <br /></div><div class="gmail_attr" dir="ltr">&nbsp; &nbsp; &nbsp;</div><div class="gmail_attr" dir="ltr">घोषणा
 पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए, टी-सीरीज़ के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, 
भूषण कुमार कहते हैं, "टी-सीरीज़ में हम हमेशा कहानियों की शक्ति में 
विश्वास करते हैं, चाहे वह संगीत के माध्यम से हो या हम जो फिल्में बनाते 
हैं।</div><div class="gmail_attr" dir="ltr">&nbsp;</div><div class="gmail_attr" dir="ltr">इसी
 विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए, हम अब आनंद एल राय, अनुभव सिन्हा, निखिल 
आडवाणी, हंसल मेहता, संजय गुप्ता, बिजॉय नांबियार, सुपरन एस वर्मा (द 
फैमिली मैन) जैसे पावरहाउस कंटेंट निर्माताओं के साथ वेब-शो का निर्माण 
करने के लिए उत्साहित हैं। मिखिल मुसाले (मेड इन चाइना), सौमेंद्र पाधी 
(जामतारा) कई और दिग्गजों में शामिल हैं।&nbsp;&nbsp;</div><div class="gmail_attr" dir="ltr">&nbsp;</div><div class="gmail_attr" dir="ltr">इसके माध्यम से हमारा लक्ष्य दुनिया भर में अपने दर्शकों के लिए तैयार की गई नई, मौलिक और विशिष्ट कहानियों&nbsp; की पेशकश करना है।"</div><div class="gmail_attr" dir="ltr"><br /></div><div class="gmail_attr" dir="ltr">Bhushan Kumar forays into OTT-space</div><div class="gmail_attr" dir="ltr"><br /></div><div class="gmail_attr" dir="ltr">&nbsp;<div class="gmail_attr" dir="ltr"><br /></div><div class="gmail_attr" dir="ltr">भूषण कुमार ने ओटीटी-स्पेस में दस्तक दी</div></div><div class="gmail_quote"><div lang="EN-IN" link="blue" vlink="purple"><p class="MsoNormal">&nbsp;</p></div></div>  </div>  </div></div>  </div></div></div>  ]]> </content:encoded>
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<title>&amp;quot;जनता सेवार्थ प्रतिबद्धता&amp;quot;  के आदर्श वाक्य को सिद्ध करता सुनील बिश्नोई</title>
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<description><![CDATA[ आज हम एक ऐसे शख्स के बारे में आपको बताने जा रहे है जिसने अपने कार्य से यह सिद्ध कर दिया है कि यदि जनता की सेवा करने का जज़्बा हो तो पद, स्थान आदि गौण हो जाते है। जी हाँ। हम बात कर रहे है राजस्थान के गाँव खेड़े से पढ़ाई करके निकले योद्धा सुनील बिश्नोई के बारे में, आइए हम आपको उनके जीवन से पर ]]></description>
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<pubDate>Tue, 25 Jan 2022 15:11:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>JR Choudhary</dc:creator>
<media:keywords>Human Story, Rajasthan</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<br />&nbsp;आज हम एक ऐसे शख्स के बारे में आपको बताने जा रहे है जिसने अपने कार्य से यह सिद्ध कर दिया&nbsp; है कि यदि जनता की सेवा करने का जज़्बा हो तो पद, स्थान आदि गौण हो जाते है। जी हाँ। हम बात कर रहे है राजस्थान के गाँव खेड़े से पढ़ाई करके निकले योद्धा सुनील बिश्नोई के बारे में, आइए हम आपको उनके जीवन से परिचय करवाते है।<br /><br />वर्ष 2001 में उदयपुर जिले में पुलिस विभाग में भर्ती हुए। पुलिस में नौकरी करते हुए अधिकतर समय जिला पुलिस अधीक्षक उदयपुर के कार्यालय की विभिन्न शाखाओं में काम किया। जिनमें जिला विशेष शाखा, पासपोर्ट शाखा, क्राइम ब्रांच तथा साइबर क्राइम ब्रांच में प्रमुखता से काम किया। अपने काम के दौरान सदैव मेहनत और लगन से काम करने की वजह से उच्चाधिकारियों के चहेते बने रहे। इनके पिता स्वयं पुलिस अधिकारी की वजह से पुलिस की नौकरी को जज्बे के रूप में लिया और चुना। <br /><br />पुलिस अधीक्षक के कार्यालय में काम करते हुए वर्ष 2006 में सुनील बिश्नोई का चयन ऑल इंडिया पुलिस ड्यूटी मीट के लिए हुआ जिसमें पूरे राजस्थान के प्रत्येक रैंक के कुल करीब 25 पुलिसकर्मियों की टीम चयन होती है। सुनील बिश्नोई ऑल इंडिया के लिए चयन होने वाले उदयपुर जिले के प्रथम पुलिसकर्मी थे। जिसके लिए तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने सम्मानित किया।<br /><br />वर्ष 2009 में फतेहसागर झील पर हरियाली अमावस्या के मेले के दौरान एक युवक फतेहसागर झील में डूब रहा था जिसको सुनील बिश्नोई ने अपनी जान की परवाह न करते हुए फतेहसागर झील में से निकाला और उसकी जान बचाई। वर्ष 2011 में उदयपुर शहर में 3 किलो सोने की लूट की बड़ी गंभीर और चर्चित वारदात हुई जिसका खुलासा सुनील बिश्नोई ने साइबर क्राइम ब्रांच में रहते हुए किया। <br /><br />उस खुलासे के बाद मुंबई के उन शातिर अपराधियों और गैंगस्टर को पकड़ने में टीम के साथ मुंबई जाकर सुनील बिश्नोई की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस घटना के बाद जिला उदयपुर में कोई भी बड़ा घट अपराध घटित होने पर सुनील बिश्नोई को उस अपराध के खुलासे तथा अनुसंधान के लिए बनाई जाने वाली टीमों में रखा जाने लगा तथा शहर के और भी कई बड़े अपराधों पर नियंत्रण लगाम और खुलासे में सुनील बिश्नोई की अहम भूमिका रही। <br /><br />वर्ष 2013 में विधानसभा चुनाव में उदयपुर रेंज के सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को ट्रेनिंग देने के महत्वपूर्ण कार्य में सुनील बिश्नोई अधिकारियों के साथ रहे जिसकी वजह से उनको उदयपुर रेंज के महानिरीक्षक पुलिस ने प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। वर्ष 2014 में उदयपुर शहर के शातिर अपराधी शाकिर को लोडेड पिस्टल व ब्राउन शुगर के साथ बहादुरी से अपनी जान की परवाह न करते हुए पकड़ा जिसकी वजह से भी पुलिस अधीक्षक ने सम्मानित किया। <br /><br />थाना घंटाघर के एक मामले में एक नाबालिग लड़की के अपहरण में करीब 1 वर्ष से वांछित मुलजिम को इंटरनेट तथा साइबर क्राइम ब्रांच में रहते हुए हैदराबाद में ट्रेस किया तथा हैदराबाद जाकर पकड़ कर लेकर आए उदयपुर रेंज के महानिरीक्षक पुलिस ने सुनील बिश्नोई को सम्मानित किया। वर्ष 2014 में ही सुनील बिश्नोई की विभागीय स्तर पर पदोन्नति हुई जिसके बाद उनको शहर की सविना पुलिस चौकी में प्रभारी के रूप में नियुक्ति मिली। <br /><br />वहां भी करीब डेढ़ वर्ष तक मेहनत और लगन से कार्य करते हुए सुनील बिश्नोई ने अपने जिम्मे के काम को पूर्ण लगन और मेहनत से संपादित किया जिसकी वजह से कई बार तत्कालीन अधिकारियों ने प्रशंसा की और सम्मानित भी किया। सवीना चौकी में प्रभारी रहते हुए सबीना के जैन मंदिर से करीब ढाई सौ साल पुरानी आठ चांदी की मूर्तियां चोरी हुई जो सुनील बिश्नोई की टीम द्वारा अज्ञात बदमाशों को ट्रेस किया जा कर गंभीर वारदात का पर्दाफाश किया। <br /><br />करीब डेढ़ साल तक सविना पुलिस चौकी प्रभारी के रूप में काम करने के बाद सुनील बिश्नोई का पदस्थापन शहर के मादड़ी इंडस्ट्रियल एरिया की पुलिस चौकी प्रभारी के रूप में हुआ। मादडी पुलिस चौकी तथा प्रताप नगर पुलिस थाने पर काम करते हुए सुनील बिश्नोई ने कई मामलों का खुलासा किया तथा क्षेत्र व समाज में शांति व्यवस्था कायम रखने में विशेष योगदान दिया।<br /><br />तत्पश्चात सुनील बिश्नोई का पदस्थापन वर्ष 2020 मैं पुलिस थाना सविना पर हुआ। पुलिस थाना सविना पर पदस्थापन के दौरान सुनील बिश्नोई ने अपने अधिकारियों और अपनी टीम के साथ समन्वय रखते हुए कई बड़े मामलों में वांछित अपराधियों को गिरफ्तार किया तथा बड़े मामलों का खुलासा किया। जिनमें विशेष तौर पर इंटरनेशनल कॉलिंग करके एक हीरा व्यवसाई से फिरौती मांगने के मामले में अज्ञात मुलजिम को पश्चिम बंगाल से ट्रेस किया तथा पश्चिम बंगाल पहुंचकर उक्त अभियुक्त को गिरफ्तार करके लेकर आए जिसकी सभी अधिकारियों ने बहुत तारीफ की और सुनील बिश्नोई को सम्मानित भी किया। कई मामलों में फरार गैंगस्टर को हथियारों सहित तथा तस्करों को अवैध शराब व नशीले पदार्थों सहित गिरफ्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। <br /><br />इसके बाद वह जीवन पलो का प्रारम्भ होता है जिसकी कल्पना भी अकल्पनीय थी। सुनील बिश्नोई ने अपनी टीम के राजकुमार जाखड़ के साथ मिलकर काम करते हुए आज के दौर में हो रही साइबर ठगी के मामलों में कार्य करना शुरू किया। साइबर ठगी के मामलों में वर्ष 2021 और 2022 मैं पुलिस थाना सवीना की टीम सुनील बिश्नोई और राजकुमार जाखड़ द्वारा साइबर ठगी में ठगे गए करीब 50 लाख रुपए लोगों को वापस रिफंड करवाए। <br /><br />साइबर क्राइम में काम करते हुए राजस्थान की सबसे बड़ी ठगी की राशि की रिकवरी भी सुनील बिश्नोई तथा राजकुमार जाखड़ की टीम द्वारा कराई गई। करीब 10 लाख की ठगी होने पर रात भर करीब 25 वेबसाइट खंगाली तथा महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से कार्य करते हुए पीड़ित को अपनी ठगी गई संपूर्ण राशि वापस रिफंड करवाई। साइबर ठगी में उदयपुर जिले में कोई भी घटना होने पर सुनील बिश्नोई तथा राजकुमार जाखड़ की टीम को कार्य दिया जाता है तथा उसका निस्तारण भी इस टीम द्वारा पूर्ण मेहनत से किया जाता है।<br /><br />इस प्रकार से राजस्थान के साइबर योद्धा के रूप में सुनील एक जाना - पहचाना नाम बन चुका है । आज आमजन के साथ किसी भी तरह का साइबर अपराध घटित हो जाता है तो वह सिर्फ साइबर दूत के रूप में सुनील के पास अधिकारपूर्वक पहुँच कर अपनी समस्या - अपराध के बारे में बताती है और सुनील बिश्नोई व राजकुमार झाखड़ अपनी सूझबूझ से साइबर अपराधों को रोक, जनता को शांति प्रदान करते है ।<p></p>]]> </content:encoded>
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