<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?>
<rss version="2.0"
     xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
     xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
     xmlns:admin="http://webns.net/mvcb/"
     xmlns:rdf="http://www.w3.org/1999/02/22-rdf-syntax-ns#"
     xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
     xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/">
<channel>
<title>Jalore Live &#45; : पुस्तक</title>
<link>https://www.jalorelive.com/rss/category/book</link>
<description>Jalore Live &#45; : पुस्तक</description>
<dc:language>hi</dc:language>
<dc:rights>© 2026 Jalore Live &#45; All Rights Reserved.</dc:rights>

<item>
<title>यतीश कुमार की बहुप्रशंसित पुस्तक &amp;apos;बोरसी भर आँच&amp;apos; पर परिचर्चा का कार्यक्रम का आयोजन किया गया</title>
<link>https://www.jalorelive.com/lifestyle/book/a-discussion-program-was-organized-on</link>
<guid>https://www.jalorelive.com/lifestyle/book/a-discussion-program-was-organized-on</guid>
<description><![CDATA[   बीसी रॉय इंस्टिट्यूट, सियालदाह में यतीश कुमार की बहुप्रशंसित पुस्तक &#039;बोरसी भर आँच&#039; पर परिचर्चा का कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में हिंदी के सुपरिचित कवि-लेखक देवी प्रसाद मिश्र, प्रो. हितेन्द्र पटेल, प्रोफेसर वेदरमण, प्रो. संजय जायसवाल, ऋतु तिवारी और योगाचार्य भूपेन्द्र शु ]]></description>
<enclosure url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjsI2FxQZ-XxoWVNsvw1SWXS-ySf-0jVc6UJpf08yzcLMs7G_-IEJjcagkKdke-yNJBh2Rc0cYUVA5EU7gfAYi-CSG9TCvKXX-Ogw_I_US2nJa13Fpty0ktlyoA9rhHqY36K09YgWwW0ioBxgn9CnmhgGIrJwAu1EFQLyTMRouZYZcKkoQUCsR37tlpjsqW/w640-h360/image%201%5B1%5D.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 24 Jun 2024 15:28:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>JR Choudhary</dc:creator>
<media:keywords>Book, lifestyle</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<br /><p></p><div></div><div><span>&nbsp;</span></div><div><span>बीसी रॉय इंस्टिट्यूट, सियालदाह में यतीश कुमार की बहुप्रशंसित पुस्तक 'बोरसी भर आँच' पर परिचर्चा का कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में हिंदी के सुपरिचित कवि-लेखक&nbsp; देवी प्रसाद मिश्र, प्रो. हितेन्द्र पटेल, प्रोफेसर वेदरमण, प्रो. संजय जायसवाल, ऋतु तिवारी और योगाचार्य भूपेन्द्र शुक्लेश वक्ता के तौर पर उपस्थित थे। स्मिता गोयल ने अंगवस्त्र प्रदान कर सभी वक्ताओं का स्वागत व सम्मान किया।</span></div><div><span>&nbsp;</span></div><div><span>लेखक, यतीश कुमार, मूलतः बिहार के मुंगेर जिले से हैं। भारतीय रेलवे सेवा के प्रशासनिक अधिकारी हैं और 22 वर्ष की उत्कृष्ट सेवाओं के फलस्वरूप इन्हें भारत के 'सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम' का सबसे युवा अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक बनने का गौरव प्राप्त है। साहित्य सृजन के साथ-साथ विभिन्न साहित्यिक-सामाजिक संस्थाओं से भी सक्रिय रूप से जुड़े हैं। पिछले कुछ वर्षों में, चर्चित उपन्यासों, कहानियों, यात्रा-वृतान्तों पर अपनी विशिष्ट शैली में कविताई और काव्यात्मक समीक्षा के लिए इन्होंनें अपनी एक अलग पहचान बनाई है।</span></div><div><span>&nbsp;</span></div><div><span>कार्यक्रम का कुशल संचालन आलोचक विनय मिश्र नें बड़े ही सधे हुए अंदाज में किया। यतीश जी के बचपन के मित्र और इस किताब के किरदार लाभानंद जी राँची से आकर कार्यक्रम में शरीक हुए। निर्मला तोदी, कथाकर विजय शर्मा, मृत्युंजय श्रीवास्तव, मंजू रानी श्रीवास्तव, अनिला रखेचा, पूनम सोनछत्रा, रचना सरण, मनोज झा, आनंद गुप्ता, पूनम सिंह,कवि सुनील शर्मा के साथ&nbsp; रेलवे के और भी अधिकारीगण अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे। ऑडिटोरियम प्रबुद्ध श्रोताओं से अंत तक भरा रहा।</span></div><div><span>&nbsp;</span></div><div><span>अपनी बात रखते हुए प्रो. संजय जायसवाल ने कहा कि 'यह किताब व्यक्तिगत सत्य से सामाजिकता का सफर तय करती है। यह सिर्फ कथा नहीं है नई पीढ़ी को शिक्षा देने वाली किताब है। यह किताब सिर्फ अपने व्यक्तिगत पारिवारिक बखान नहीं करती हैं अपितु उस वक्त की सामाजिकता, राजनीतिकरण का सकारात्मक आख्यान है।'</span></div><div><span>&nbsp;</span></div><div><span>भूपेंद्र शुक्लेश ने कहा कि 'यह किताब आत्म-कथात्मक दस्तावेज है। इसे किसी प्रचलित श्रेणी में नहीं रखा जाना चाहिए। कोई नई श्रेणी ही तय की जानी चाहिए। किताब जीवन का साझा दस्तावेज है। जीवन को इतना खरा रख दिया कि जीवन अंगारे सा लगे। स्पष्टता, सत्यता, विनम्रता इस किताब की जान है। आध्यात्मिक जीवन में अच्छे-बुरे को किसी मापदंड में नहीं तौला जाता। इस किताब में बहुत कुछ ऐसा है कि आपको जीवन मुफ्त में जीने मिलेगा। आग्रह करुंगा कि जीवन में किसी चीज से वंचित न रह जाएं तो इस किताब से गुज़रे। वृहत रूप में कहें तो इस किताब को पढ़ना जीवन को जीना सिखाता है।'</span></div><div><span>&nbsp;</span></div><div><span>ऋतु तिवारी ने 'बोरसी भर आँच' को एक बाइस्कोप बताते हुए कहा कि लेखक ने अपने अतीत में जाकर लिखा है। इस किताब की खास बात यह है लेखक की ईमानदारी। हमें अपने जीवन के प्रति, लेखन के प्रति ईमानदार होना चाहिए। ईमानदारी हमें संवेदनशील बनाती है। आप जब इस किताब से गुज़रेंगे तो देखेंगे कि रेल की पटरियों की तरह ही चीकू के व्यक्तित्व का विस्तार हुआ है। चीकू का संघर्ष कई मायने में मानवीय है, प्रेरणा तो ले सकते हैं पर क्या हम यह कर पायेंगे कि जब हम उस संघर्ष में हो तो उतने ही मानवीय रह पायेंगे। 'बोरसी की आँच' विस्तार की प्रतिबद्धता की, जीवन दर्शन की आँच है। ये किताब हमें ये सोचने के लिए मजबूर करेगी कि हम भी अपने जीवन के प्रति, अपने समाज के प्रति इतने ही ईमानदार हो सकते हैं चाहे परिस्थितियों कैसी भी हो।</span></div><div><span>&nbsp;</span></div><div><span>प्रोफेसर, आलोचक वेद रमण ने अपनी बात रखते हुए कहा कि यह यतीश जी की पद्य से गद्य की, अतीत से बाइस्कोप की यात्रा है। इस पुस्तक में जीवन संघर्ष अगर किसी का है तो वह माँ का है। जीवन साहस अगर किसी का है तो दीदी का है। जीवन मेधा अगर किसी की है तो बड़े भाई की, जीवन प्रेम&nbsp; अगर किसी का है तो स्मिता का है, तब इस पुस्तक में चीकू क्या है ? दरअसल गो-रस की तरह चीकू ने अपने जीवन को धीरे-धीरे पकाया और इन सबको ले चीकू इस पुस्तक के केंद्र में आ गया। एक नक्षत्र बन गया, एक सितारे की तरह चमक गया। आज के समय में जब सब अपनी-अपनी स्मृतियों को लिखने में लगे हैं, यह पुस्तक साझी स्मृतियों की बात कहती है। इस पुस्तक से सूक्तियों का एक संकलन तैयार किया जाए तो एक अलग पुस्तिका निकाली जा सकती है।</span></div><div><span>&nbsp;</span></div><div><span>साहित्य में सफलता के लिए क्या चाहिए, व्यवहार कुशल होना चाहिए, प्रबंध कौशल होना चाहिए, संसाधन कौशल भी होना चाहिए। सभी से ऊपर कौशल को क्रियान्वित करने की कुशलता भी होनी चाहिए। यह किताब एक व्यक्ति के,आज की युवा पीढ़ी के स्वपन व संघर्ष की गाथा है।</span></div><div><span>&nbsp;</span></div><div><span>प्रो. हितेंद्र पटेल ने कहा कि 'एक समाज के रूप में हम बहुत पीछे हैं बल्कि हमारा समाज अभी बन रहा है। अब हम एक ऐसे समाज में आ चुके हैं जहां सभ्य बनने की गुंजाइश ख़ुद पैदा करनी होगी। साहित्य दर्द का ही एक बड़ा आख्यान बन कर ही आता है।&nbsp; इस किताब की ईमानदारी व्यक्तिगत ईमानदारी नहीं है। समाज-गत ईमानदारी है।</span></div><div><span>&nbsp;</span></div><div><span>ये किताब आत्मकथा तो नहीं है। आत्म-कथात्मक है, आत्मकथा के लिये खोजबीन में जाना होगा और ये किताब सैरबीन है। इस किताब में सब कुछ है बस उसे खोजना होगा। सत्य संरचना का पर्याय यश कभी नहीं हो सकता। यतीश जी ने अचूके ही सही उस समय के यथार्थ को छू दिया है जो टप-टप बूंद के रुप में किताब में झर रहा है और हमें चाहिए कि उस यथार्थ से अपने यथार्थ को जोड़े। जीवन बनाना नहीं समझना है।</span></div><div><span>&nbsp;</span></div><div><span>देवी प्रसाद मिश्र जी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि 'साहित्य में हम अपनी वैधता ढूँढते हैं, सामाजिक सांस्कृतिक वैधता... इसके&nbsp; बिना फिर हम अपने जीवन में कुछ भी नहीं है। इस अर्थ में देखो तो यह किताब एक स्ट्रैटेजिक संरचना सी लगती है। एक इकनॉमिक काम लगता है एक सुचेतिक काम लगता है। इसमें बहुत कुछ अनकॉन्शियस है बहुत कुछ अवचेतन से भरा हुआ है जो कि जाहिर है की अवचेतन और स्मृतियों के बीच एक गहरा संबंध देखा गया है।</span></div><div><span>&nbsp;</span></div><div><span>लेकिन यहां जैसे की ये अपने को विखंडित कर रहा हो। एक तरह से रिवर्सल ऑफ पावर स्ट्रक्चर हो रहा हो कि दरअसल हमारे मुख्य भूमि मानो भूमि क्या है...और मूलतः ये एक जो बुनियादी मार्मिकता है उसके पावर स्ट्रक्चर की जो लेयर है उसको मिटा नहीं सकती और इस तरह से दारिद्रय की ओर जाना अपने को मुक्त करना है इस पूरे पैराफरनेलिया से... हो सकता है इतने स्थूल तरीके से इस किताब में ना सोचा गया हो लेकिन लगता है शक्ति संरक्षण को लेकर शायद पश्चात है कोई जो इसे अतीत की ओर ले जाता है यह जाहिर करने के लिए की दरअसल मैं ये हूं... एक अमिटता है इसमें... तो यह अपने को इस तरह से उल्लेख करना मात्र अपनी जड़ों की ओर जाने का नॉस्टैल्जिया नहीं है बल्कि यह एक आयत बोध है, इस बात को उपलब्ध करने के लिए कि भारत एक इस तरह की विपन्नता, पारस्परिकता, परिवारिकता, कौटुंबिता और इस तरह की आपबीती से बना हुआ है और जो आपबीती है वह परबीती भी है। इस अर्थ में देखें तो यह किताब भारत को, अपने को, अपने परिवेश, समाज को पुनराविशित करने की किताब है। जो की बेहद पठनीय है, उदार है, समावेशी है सूक्तियों से भरी एक कवि की किताब है।</span></div><div><span>&nbsp;</span></div><p><!-- x-tinymce/html -->


























</p><div></div><p></p><div><span>यह पूरी सामाजिक आर्थिक गहरे इतिहास बोध से भरी किताब है। इस तरह से इसमें एक सामाजिक राजनैतिक संगम हमें दिखाई देता है। इसमें निर्मलता और अकलुषता का दस्तावेज है। उम्र की मासूमियत है। बहुत सारे दुराव, निंदा, पतन के बावजूद एक इंसान इन सभी चीजों को बटोर देख रहा है ऐसा प्रतीत होता है इस किताब में... मेरे लिए यह बहुत महत्वपूर्ण किताब है।'</span></div>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>नीलम सक्सेना चंद्रा – लेखन की दुनिया में एक और कदम</title>
<link>https://www.jalorelive.com/lifestyle/book/neelam-saxena-chandra-another-step-into</link>
<guid>https://www.jalorelive.com/lifestyle/book/neelam-saxena-chandra-another-step-into</guid>
<description><![CDATA[  लोकप्रिय भारतीय कवी और लेखक, नीलम सक्सेना चंद्रा ने अपने नए काव्य संग्रह “परिंदों सा लिबास” के प्रकाशन के साथ अपनी कीर्ति की दिशा में एक और कदम उठाया है| इनकी कवितायें यूँ भी कई भारतीय ही नहीं, विश्व में भी सुनी जाती हैं और पढ़ी जाती हैं, और आप अपनी हर नयी पुस्तक के साथ साहित्य के क्षेत्र में  ]]></description>
<enclosure url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgmHN7JXxUB-Zd_WjBSmR1XYwjxaaER1FmSF0UoqIBOCImrIYQv2GgqJGL5VQg0xMVwraCDec48CjPgLnA_BEzlvK3AmqWdeJnMUPbR-t9q78_awiN68KovBIW7nuBSzmiZu9evd7ZyTWV1uJVGk9NyNMUAm1vcl_mP_YXFTA8D7BYNNi5zDlXmrCBGgR7x/w640-h360/1%5B1%5D.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 10 Jun 2024 18:31:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>JR Choudhary</dc:creator>
<media:keywords>Book, lifestyle</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<br /><p></p><p><!-- x-tinymce/html --></p><p>लोकप्रिय भारतीय कवी और लेखक, नीलम सक्सेना चंद्रा ने अपने नए काव्य संग्रह “परिंदों सा लिबास” के प्रकाशन के साथ अपनी कीर्ति की दिशा में एक और कदम उठाया है| इनकी कवितायें यूँ भी कई भारतीय ही नहीं, विश्व में भी सुनी जाती हैं और पढ़ी जाती हैं, और आप अपनी हर नयी पुस्तक के साथ साहित्य के क्षेत्र में अपना नाम और भी रोशन करती जाती हैं|<br />नीलम एक द्विभाषी कवी और लेखक हैं, और अंग्रेजी और हिंदी भाषाओं में इनकी अच्छी पकड़ है| यह लिखती भी कई विधाओं में हैं – कविता, उपन्यास, कहानियाँ, बच्चों की कहानियाँ इत्यादि| इनके बारे में यदि बताया जाए तो यह एक रेलवे ऑफिसर हैं और विद्युत् अभियंता हैं| उनके ही शब्दों में, “मुझे लेखन कार्य करने की ऊर्जा देता है!” आप बड़े ही साधारण शब्दों में आसपास की घटनाओं से प्रेरित होकर कविता और कहानियों को लिखती हैं| शायद यही वजह है कि इनकी कवितायें और कहानियाँ इतनी लोकप्रिय हैं|<br />नीलम अभी तक चौहत्तर पुस्तकें लिख चुकी हैं| इनकी लिखने की प्रेरणास्त्रोत इनकी माँ थीं जिनसे इन्हें जिंदगी की भी उर्जा मिलती थी| इनमें पुस्तकों में से कई पुस्तकें बेस्ट-सेलर लिस्ट में पहुँच चुकी हैं व सराही जा चुकी हैं| इनकी बच्चों की कहानियाँ भी बहुत सराही जाती हैं और इनकी एक चित्रकथा का करीब छह भाषा में भाषांतरण किया गया है|<br />राष्ट्रीय स्तर पर तो नीलम ने कई पुरस्कार हासिल किये ही हैं जिसमें अमेरिकन एम्बस्सी और आरुषी द्वारा आयोजित प्रतियोगिता में गुलज़ार साहब द्वारा पुरस्कार, महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य समिति द्वारा पुरस्कार, चिल्ड्रेन बुक ट्रस्ट द्वारा पुरस्कार, रेल मंत्रालय द्वारा प्रेमचंद पुरस्कार आदि शामिल हैं| नीलम को अन्तराष्ट्रीय स्तर पर भी कई पुरस्कार हासिल हुए हैं जैसे नेशनल अलायन्स ऑफ़ मेंटल हेल्थ, अमेरिका द्वारा काव्य प्रतियोगिता में पुरस्कार, ज्हेंग निआन कप, रुएल अंतराष्टीय लाइफ टाइम पुरस्कार इत्यादि| आपके नाम पर लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड्स में तीन बार रिकॉर्ड दर्ज हैं| फोर्ब्स ने भी २०१४ में ७८ लोकप्रिय लेखकों की सूची में आपको शामिल किया था|<br />नीलम के नए काव्य-संग्रह का नाम है “परिंदों सा लिबास” जिसमें हिन्दुस्तानी भाषा में ५० कवितायें हैं| जब नीलम से पूछा गया कि यह काव्य संग्रह किस विषय पर आधारित है, तो उन्होंने कहा, “आदमी के पैदा होते ही, उसे न जाने कौन-कौन सी दीवारों में बंद कर दिया जाता है! पर उसे यूँ बाँधने वाले यह भूल जाते हैं कि आदमी के जिस्म को ही बाँधा जा सकता है, रूह को नहीं! रूह तो आज़ाद होती है! रूह तो मानो परिंदों के लिबास में आती है, और वो उड़ना ही जानती है| और उसकी उड़ान की दिशा भी तय है – अँधेरों से उजालों की ओर!” काफी दिलचस्प है यह ख़याल, है ना?<br />नीलम से आगे पूछा गया कि वो क्या ख़ास बात थी जिसने इन्हें यह संग्रह लिखने की प्रेरणा दी, तो उन्होंने कहा, “यह अलग-अलग वक़्त पर घटनाओं पर आधारित कवितायें हैं| कुछ में कोरोना की बेबसी है, कुछ में ख़ुद के दिल में जोश भरने की कोशिश है, कुछ में प्रकृति से सीख है और कुछ किसी और करीबी दोस्त के साथ हो रही बातों को ध्यान में रखते हुए लिखी गयी हैं| ज़्यादातर कवितायें नीलम के द्वारा उनकी पुणे में पोस्टिंग के वक़्त लिखी गयी हैं| ख़ास बात यह है कि नीलम को तस्वीरें खींचने का भी शौक है और ज़्यादातर कविताओं के साथ पुस्तक में छपी हुई तस्वीरें उनके द्वारा खींची हुई हैं|<br />इस काव्य-संग्रह का कवर पेज डॉ रेणु मिश्रा की पेंटिंग पर आधारित है| इस पुस्तक को प्रकाशित किया है ऑथर्स प्रेस पब्लिशिंग हाउस, नई दिल्ली ने|<br />नीलम सक्सेना चंद्रा के काव्य-संग्रह का विमोचन गोदरेज डांस थिएटर, नेशनल सेंटर फॉर परफोर्मिंग आर्ट्स, मुंबई में १३ जून को ६:३० पर है| पुस्तक विमोचन के कार्यक्रम में ख़ास अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे&nbsp; प्रशांत करकरे, निदेशक (लीगल), नेशनल सेंटर फॉर परफोर्मिंग आर्ट्स,&nbsp; शलभ गोएल, प्रेसिडेंट कल्चरल अकादेमी, पश्चिम रेलवे,&nbsp; अशोक बिंदल, जानेमाने लेखक और कवी और&nbsp; सिद्धार्थ देशपांडे, चीफ वित्त अधिकारी, नेशनल सेंटर फॉर परफोर्मिंग आर्ट्स|<br />नीलम लिटरेरी वारियर ग्रुप नामक साहित्यिक ग्रुप के फाउंडर भी हैं और इस ग्रुप के कवी पूजा धाडीवाल, नागपुर, वहीदा हुसैन, जबलपुर, आशु रात्रा, नागपुर एवं पल्लवी जैन, बाहरेन से ख़ास आ रही हैं एक कवी सम्मलेन के लिए| नई दिल्ली से&nbsp; सुनील चौधरी, “दीद” लखनवी स्वरचित ग़ज़ल सुनायेंगे और उसके पश्चात नीलम द्वारा लिखित एक लघु नाटिका को माइम के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा| प्रोग्राम का संचालन नेशनल सेंटर फॉर परफोर्मिंग आर्ट्स से सुजाता जाधव करेंगी|<br />इस प्रोग्राम को देखने के लिए “बुक माय शो” पर बुक किया जा सकता है| प्रवेश निशुल्क है|</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>जल्द आएगी &amp;apos;साईं धाम के अविस्मरणीय पल&amp;apos; पुस्तक</title>
<link>https://www.jalorelive.com/lifestyle/book/the-book-unforgettable-moments-of-sai</link>
<guid>https://www.jalorelive.com/lifestyle/book/the-book-unforgettable-moments-of-sai</guid>
<description><![CDATA[  कौशांबी: जल्द आयेगी “साईं धाम के अविस्मरणीय पल” नामक पुस्तक लेखक अक्षित द्विवेदी उर्फ़ देवांश दत्त द्विवेदी ने दी जानकारी, पुस्तक साईं मंदिर, साईं धाम के ऊपर लिखित।  साईं धाम के अविस्मरणीय पल के लेखक अक्षित द्विवेदी उर्फ़ देवांश दत्त द्विवेदी ने बताया कि पुस्तक में साई धाम क ]]></description>
<enclosure url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg8Yrkm15Y65d781saVpmAyPhCXMFK5zlId-urYdKaCDcPTm-geVgktvcu4696MsHXTek1Lw9h047oQjZSqH_ihyphenhyphenop6dRdr29goUXS58Hd_pGBJx9E8XKPvNlBbZNpoXaZJT1nzZlKRu6TD6Wpjs1lczi3NksYAbx3Pgn4Mtf859fzts7sTmHKz-_Y4PITP/w640-h360/Image%20NW%20(1).jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 01 Mar 2024 18:08:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>JR Choudhary</dc:creator>
<media:keywords>Book, lifestyle</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<br /><p></p><div><span><strong></strong></span></div><div><span><strong>कौशांबी:&nbsp;</strong>जल्द आयेगी “साईं धाम के अविस्मरणीय पल” नामक पुस्तक लेखक अक्षित द्विवेदी उर्फ़ देवांश दत्त द्विवेदी ने दी जानकारी, पुस्तक साईं मंदिर, साईं धाम के ऊपर लिखित।&nbsp;</span></div><div><span>&nbsp;</span></div><div><span>साईं धाम के अविस्मरणीय पल के लेखक अक्षित द्विवेदी उर्फ़ देवांश दत्त द्विवेदी ने बताया कि पुस्तक में साई धाम की महिमा और चमत्कार का वर्णन किया गया है। साई धाम के अविस्मरणीय पल के माध्यम से सभी साई भक्तों तक साई बाबा के चमत्कारों एवं भक्तों के साथ हुए अनुभवों को इस पुस्तक में बताया गया है, इस पुस्तक में साई महोत्सव का वर्णन है, जो साई मंदिर की वार्षिक उत्सव के रूप में हर वर्ष 6 और 7 दिसंबर को मनाया जाता है। साई महोत्सव में साई भजन संध्या, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं विशाल भंडारा का आयोजन होता है। पुस्तक में इंटरनेशनल साई सेवा ट्रस्ट के विषय में भी चर्चा की गई है, जिसकी अध्यक्ष श्रीमती सुशीला द्विवेदी जी हैं एवं साई मंदिर की स्थापना के विषय में पूर्णता जानकारी भी इस पुस्तक में दी गई है, साई मंदिर के संस्थापक श्री कृष्ण दत्त द्विवेदी जी है। साई मंदिर में हुए चमत्कारों एवं मंदिर में होने वाली दैनिक दिनचर्या का भी विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है।</span></div><div><span>&nbsp;</span></div><div><span>साईं मंदिर मंझनपुर में आज गुरुवार को हुई विशेष पूजा अर्चना, जिला न्यायालय कौशांबी के पास साईं धाम मंझनपुर कौशांबी में स्थित सुप्रसिद्ध साईं मंदिर की स्वयं खासियत और महत्व है। साईं बाबा के मंदिर में सत्यनारायण व्रत कथा एवं हवन प्रत्येक गुरुवार के दिन होता है और विशेष पूजा अर्चना की जाती है। साईं मंदिर में ठंड के पहलें, साईं भजन संध्या का आयोजन किया जाता था परंतु ठंड को देखते हुए साईं धाम के संस्थापक केडी द्विवेदी ने थोड़े दिनों के लिए रोक दिया है। साईं मंदिर में गुरूवार के दिन बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ती है, साईं बाबा के इस मंदिर का अपना ही एक महत्व है साईं बाबा के मंदिर की स्थापना सन् 2011 में अधिवक्ता केडी द्विवेदी और अधिवक्ता सुशीला द्विवेदी द्वारा की गई है।</span></div><div><span>&nbsp;</span></div><p><!-- x-tinymce/html -->







</p><div></div><p></p><div><span>गुरूवार के दिन जो श्रध्दालु साईं बाबा का साईं व्रत करते हैं वो मंदिर परिसर में आकर साईं बाबा की विशेष रूप से पुजा अर्चना करते हैं और जिन भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है वो अपने व्रत का उद्यापन करते हैं।</span></div>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>सेल्स कौशल के विकास के गुर सीखने वालों के लिए यथार्थ किताब साबित होगी &amp;apos;बेचने की कला&amp;apos;</title>
<link>https://www.jalorelive.com/lifestyle/book/the-art-of-selling-will-prove-to-be</link>
<guid>https://www.jalorelive.com/lifestyle/book/the-art-of-selling-will-prove-to-be</guid>
<description><![CDATA[  विभिन्न नेशनल इंटरनेशनल कंपनी में सेल्स का 15 वर्षो का अनुभव रखने वाले पुष्पेश सिंह ने किताब में अपने अनुभव के निचोड़ को पाठकों के समक्ष रखा है  - नेशनल और मल्टी नेशनल कंपनियों में सेल्स का लंबा अनुभव रखने वाले पुष्पेश सिंह लिखित पुस्तक ‘बेचने की कला’ उन व्यक्तियों के लिए एक अनिवार्य पु ]]></description>
<enclosure url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiAy5MyEHdAq6YWDXSHPRDNKsH0NUL9144ncdcfzp8rzv1L8wHba7GmpLc5HeGhMqN0B16JCVoVq_mxCF1GLK_D0Z8IOg7OzmYTcPLazIbQzyQBKS-f00GnCtJmBmvx-Idrlt6G3wrRL8gn5sLFcpcB-6WePUioLixYaK5umfMg6aTuYfx-GluGpi5T7A1Z/w640-h360/image%201.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 24 Jan 2024 14:33:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>JR Choudhary</dc:creator>
<media:keywords>Book, lifestyle</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<br /><p></p><div><span></span></div><div><span>विभिन्न नेशनल इंटरनेशनल कंपनी में सेल्स का 15 वर्षो का अनुभव रखने वाले पुष्पेश सिंह ने किताब में अपने अनुभव के निचोड़ को पाठकों के समक्ष रखा है</span></div><div><span>&nbsp;</span></div><div><span>- नेशनल और मल्टी नेशनल कंपनियों में सेल्स का लंबा अनुभव रखने वाले पुष्पेश सिंह लिखित पुस्तक ‘बेचने की कला’ उन व्यक्तियों के लिए एक अनिवार्य पुस्तक कहा जा सकता है, जो अपने सेल्स कौशल को बढ़ाने के लिए इच्छुक हैं।&nbsp;</span></div><div><span>&nbsp;</span></div><div><span>याहू, ज़ी, एनडीटीवी, लिंक्डइन और गूगल जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में 15 से अधिक वर्षों के अनुभव के साथ एक अनुभवी सेल्स पेशेवर पुष्पेश सिंह द्वारा लिखित यह पुस्तक एक सफल सेल्स करियर बनाने के लिए अमूल्य अंतर्दृष्टि और रणनीति प्रदान करती है। यह पुस्तक सेल्स के स्पेक्ट्रम को कवर करती है, एक मजबूत कार्य नीति विकसित करने से लेकर अनुनय की जटिलताओं पर महारत हासिल करने तक के गुर इसमें दर्शाए गए हैं। विशेष रूप से यह पुस्तक केवल वित्तीय लाभ की खोज से परे है, जो किसी के काम में व्यक्तिगत संतुष्टि खोजने पर ध्यान केन्द्रित करते हुए दूसरों को उनकी सफलता में सहायता करती है। चाहे आप सेल्स के क्षेत्र में एक नौसिखिए हों या अपने करियर को ऊपर उठाने वाले एक महत्वाकांक्षी पेशेवर हों, ‘आर्ट ऑफ सेल्स’ ज्ञान का खजाना है, जो आपको अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए सशक्त बनाएगी, इसलिए सेल्स के सभी उत्साही प्रोफेशनल्स को यह पुस्तक अवश्य पढ़नी चाहिए।</span></div><div><span>&nbsp;</span></div><div><span>&nbsp;</span></div><div><strong>- लेखक पुष्पेश सिंह के बारे में :-</strong></div><div><span>&nbsp;</span></div><div><span>पुष्पेश सिंह एक पूर्ण करियर और जीवन प्राप्त करने में सहायक होने के लिए समर्पित एक प्रमुख सेल्स पेशेवर, मेंटर, और कोच हैं। भारत के उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद नाम छोटे शहर से, पुष्पेश ने अपने करियर की शुरुआत Ceasefire में फायर सेफ्टी सिलेंडर्स बेचकर की। एक कम प्रसिद्ध कॉलेज से स्नातक करने के बावजूद, उन्होंने LinkedIn, Yahoo, और वर्तमान में कैनेडा के टोरॉन्टो में Google जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड के लिए काम किया। पुष्पेश की पेशेवर विकास के प्रति समर्पण उनके टॉप संस्थानों जैसे MIT-Sloan और IIM-Bangalore से पाठ्यक्रम और प्रमाणपत्रों के पूरा किए जाने से स्पष्ट होता है, जो उन्हें एक उच्च उत्पादक और सफल पेशेवर बनाता है।</span></div><div><span>&nbsp;</span></div><div><a href="http://authorpushpeshsingh.com/"><span>http://authorpushpeshsingh.com/</span></a></div><p><!-- x-tinymce/html -->













</p><div></div><p></p><div><span>&nbsp;</span></div>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>प्रभा खेतान फाउंडेशन ने किताब कार्यक्रम में अनंत विजय की पुस्तक के अनावरण के साथ अयोध्या चैप्टर की शुरुआत की</title>
<link>https://www.jalorelive.com/lifestyle/book/prabha-khaitan-foundation-launches</link>
<guid>https://www.jalorelive.com/lifestyle/book/prabha-khaitan-foundation-launches</guid>
<description><![CDATA[  प्रभा खेतान फाउंडेशन (पीकेएफ) ने अयोध्या के राज सदन में स्थित रॉयल पैलेस में प्रतिष्ठित पत्रकार और लेखक अनंत विजय की नयी हिंदी पुस्तक, &quot;ओवर द टॉप: ओटीटी का मायाजाल&quot; के अनावरण के साथ अयोध्या में अपने नए चैप्टर की शुरुआत के साथ अपने सांस्कृतिक और साहित्यिक पदयात्रा का विस्तार किया। अयोध्या में  ]]></description>
<enclosure url="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiURnZ8VO4qPJd4rSyqjiNbf1QzSmFbVDoOvNaewqGq6muBqKmuJhoFECP84hFQHU4_yp8rGBfcdq9vCzGpZC5R1fOtZGO-pePww2AvWsf2fht7D_Gfv9D1EqNf_DS1LnHe8u58Gq6U9smmTL7_TWguUnh38OlfC2vqVUiYsC2A7yHsJ8fMioncKgzYZqgR/w640-h360/image.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 12 Dec 2023 17:23:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>JR Choudhary</dc:creator>
<media:keywords>Book, lifestyle</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<br /><p></p><p><br /></p><p></p><p>प्रभा खेतान फाउंडेशन (पीकेएफ) ने अयोध्या के राज सदन में स्थित रॉयल पैलेस में प्रतिष्ठित पत्रकार और लेखक अनंत विजय की नयी हिंदी पुस्तक, "ओवर द टॉप: ओटीटी का मायाजाल" के अनावरण के साथ अयोध्या में अपने नए चैप्टर की शुरुआत के साथ अपने सांस्कृतिक और साहित्यिक पदयात्रा का विस्तार किया।</p><p>अयोध्या में शाही परिवार के वंशज और राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी श्री बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा ने शहर में रहने वाले अन्य बड़ी हस्तियों की उपस्थिति में औपचारिक रूप से अनंत विजय की पुस्तक का अनावरण किया। इस मौके पर मौजूद अन्य गणमान्य समाज की प्रतिष्ठित हस्तियों में गिरीश पति त्रिपाठी (अयोध्या के मेयर), राज करण नैय्यर (एसएसपी अयोध्या), पंडित मिथिलेश नंदिनी शरण, गौरव दयाल (अयोध्या के पुलिस आयुक्त) के अलावा समाज के कई अन्य वरिष्ठ सदस्य मौजूद थे।</p><p>इस कार्यक्रम के बाद संवाद सत्र का आयोजन किया गया। जिसमें मनोज राजन त्रिपाठी के साथ चर्चा सत्र में लेखक अनंत विजय ने अपनी इस पुस्तक से लेकर कहानियां, उपाख्यान और अंतर्दृष्टि से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचारों को साझा किया।</p><p>प्रभा खेतान फाउंडेशन ने हाल ही में भारत और विदेशों में 55 से अधिक शहरों में अपने सांस्कृतिक और साहित्यिक पदचिह्न का विस्तार करने के लिए न्यूयॉर्क, भूटान और उत्तर-पूर्व भारत के सात राज्यों के कुछ प्रमुख शहरों को शामिल किया है, जिसमें भगवान राम की नगरी अयोध्या का नवीनतम जुड़ाव शामिल है। इससे पहले, जुलाई 2023 में, प्रभा खेतान फाउंडेशन ने अयोध्या में तीन दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव, रामायण कला उत्सव का आयोजन किया था।</p><p>सरयू नदी के तट पर कवि-संत तुलसीदास के रामचरितमानस की पवित्र साहित्यिक विरासत से धन्य हुए प्रभा खेतान फाउंडेशन के लिए अयोध्या में शाही तरीके से अपनी साहित्यिक यात्रा को हरी झंडी दिखाना एक गौरवपूर्ण और महत्वपूर्ण पल था।</p><p>इस मौके पर लखनऊ की अहसास संस्था की महिला सदस्य दीपा मिश्रा ने प्रभा खेतान फाउंडेशन और इसकी बहुआयामी सांस्कृतिक और साहित्यिक पहल का परिचय देते हुए परिचयात्मक भाषण दिया। उन्होंने स्वागत भाषण देने के लिए अयोध्या के शाही परिवार से प्रसिद्ध भारतीय कवि, संगीत और सिनेमा विद्वान यतींद्र मिश्रा को आमंत्रित किया।</p><p>लेखक अनंत विजय पिछले दो दशकों से पत्रकारिता अनुभव के साथ दैनिक जागरण के वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं। उन्होंने विभिन्न शैलियों में नौ किताबें लिखी हैं तथा मार्क्सवाद का अर्धसत्य, बेस्टसेलिंग बॉलीवुड सेल्फी और उनकी नयी पुस्तक ओवर द टॉप: ओटीटी का मायाजाल के लेखक हैं। सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ लेखन के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।</p><p><!-- x-tinymce/html -->







</p><p>&nbsp;</p>]]> </content:encoded>
</item>

</channel>
</rss>